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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ब्लू व्हेल- न खेलें बच्चे, अभिभावक रहें सतर्क

By Babita KashyapEdited By:
Published: Thu, 24 Aug 2017 12:19 PM (IST)Updated: Thu, 24 Aug 2017 12:21 PM (IST)

प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एडवाइजरी में स्कूलों व अभिभावकों को निर्देश जारी किए हैं।

ब्लू व्हेल- न खेलें बच्चे, अभिभावक रहें सतर्क
ब्लू व्हेल- न खेलें बच्चे, अभिभावक रहें सतर्क

शिमला, राज्य ब्यूरो। 'सुसाइड गेम- के नाम से मशहूर 'ब्लू व्हेल- को लेकर प्रदेश पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है कि ब्लू व्हेल गेम के कारण देशभर में दो सप्ताह के भीतर 12 से 19 वर्ष के छह से अधिक बच्चों ने आत्महत्या कर ली है। 

 

प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एडवाइजरी में स्कूलों व अभिभावकों को निर्देश जारी किए हैं। अध्यापकों व अभिभावकों को बच्चों पर नजर रखने, उनकी प्रवृत्ति को बारीकी से देखने और बच्चों के मोबाइल फोन व उनके बैग व अन्य सामान को जांचने को कहा गया है। विशेष रूप से बच्चों व युवाओं के व्यवहार पर नजर रखने को कहा गया है। 

 

किसी भी तरह का मानसिक तनाव पाए जाने पर इस संबंध में तुरंत साइबर सेल से संपर्क करने व चिकित्सक से परामर्श की सलाह दी गई है। अभिभावकों को बच्चों को यह गेम न खेलने देने के लिए कहा गया है। केंद्र सरकार ने ब्लू व्हेल गेम को हटाने के लिए फेसबुक, गूगल व इंस्टाग्राम को लिखा है। 

 

मोबाइल फोन के प्ले स्टोर में अभी भी यह गेम मौजूद है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। इस गेम में करीब 50 टास्क दिए जाते हैं। हैकर गेम खेलने को मजबूर करता है। बीच में गेम को छोड़कर नहीं जा सकते हैं। हैकर बच्चों को गेम के दौरान ऐसे टास्क देते हैं जो उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर देते हैं।

 

सतर्कता

-प्रदेश पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, स्कूलों व अभिभावकों को निर्देश 

-मानसिक तनाव पाए जाने पर साइबर सेल से संपर्क करने व चिकित्सक से परामर्श की सलाह

-ब्लू व्हेल के कारण दो सप्ताह में छह से अधिक बच्चों ने की आत्महत्या

 

साइबर सेल ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

 

प्रदेश साइबर सेल ने ऐसे मामलों की शिकायत और किसी भी तरह की जानकारी के लिए दो

हेल्पलाइन नंबर 2621331, 2627955 जारी किए हैं। 

 

क्या है एडवाइजरी में

- बच्चों पर हमेशा नजर रखें।

- बच्चा डरा व सहमा हो तो ध्यान दें।

- बच्चों व युवाओं के मोबाइल फोन को जांचें कि उनमें कौन सी गेम्स हैं। 

- कॉल लॉग व मैसेज बॉक्स को जांचते रहें।

- व्यवहार में बदलाव नजर आए तो तुरंत चिकित्सक को बताएं।

- बच्चे एकांत में रहना पसंद करें और मोबाइल अधिक इस्तेमाल करें तो ध्यान दें।

 

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