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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एक बार दिखाया तो 1000 का फटका

By JagranEdited By:
Published: Tue, 07 Mar 2017 01:00 AM (IST)

जागरण संवाददाता, टांडा : अगर आप किसी साधारण बीमारी से पीड़ित हैं और चाहते हैं कि विशेषज्ञ की सेवाए

एक बार दिखाया तो 1000 का फटका
एक बार दिखाया तो 1000 का फटका

जागरण संवाददाता, टांडा : अगर आप किसी साधारण बीमारी से पीड़ित हैं और चाहते हैं कि विशेषज्ञ की सेवाएं ली जाएं तो यह ख्याल आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में कुछ डॉक्टरों की कैमिस्टों के साथ मिलीभगत से मरीजों को लूटा जा रहा है। कमीशनखोरी के चक्कर में कुछ डॉक्टर साधारण बीमारी के लिए भी ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। इतना ही नहीं ये दवाएं भी कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती हैं और एक ही बार में मरीज को कम से कम एक हजार रुपये का फटका लग जाता है।

कुछ डॉक्टरों की कमीशनखोरी की लत का खामियाजा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। उन्हें गले में संक्रमण, बुखार या ऐसी ही अन्य छोटी-मोटी बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए हजारों रुपये खर्च कर ब्रांडेड दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि चिकित्सक उनको बाकायदा दवा खरीदने के लिए दुकान भी बताते हैं और यह भी हिदायत देते हैं कि खरीदने के बाद दवा चेक करवाकर जाएं। जब उन्होंने जन औषधि केंद्र या सिविल सप्लाई की दुकान से ये दवाएं खरीदनी चाही तो वहां ये मिली ही नहीं। जब वे थक-हारकर डॉक्टर की बताई दुकान पर पहुंचे तो वहां दवाएं तो मिल गई, लेकिन इसके बदले 800 से 1000 रुपये चुकाने पड़े।

वहीं, अब सवाल यह उठता है कि जब 56 प्रकार की दवाएं टांडा मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी में उपलब्ध हैं तो चिकित्सक इन्हें क्यों नहीं लिख रहे हैं। अस्पताल की डिस्पेंसरी में मिलने वाली दवाओं में बुखार, संक्रमण, एलर्जी व ताकत की गोलियां इत्यादि शामिल हैं, परंतु इन्हें लिखा ही नहीं जाता है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप की दवा भी अस्पताल की डिस्पेंसरी में उपलब्ध है। वहीं, करीब 200 प्रकार की दवाएं जन औषधि केंद्र में उपलब्ध हैं। जन औषधि केंद्र में मिलने वाली दवाओं की कीमत बाजार से कई गुणा कम है।

उधर, टांडा मेडिकल कॉलेज में कुछ चिकित्सक ऐसे भी हैं जो मरीजों को सस्ती दवाएं लिखते हैं और साथ ही यह भी बता देते हैं कि ये दवाएं जन औषधि केंद्र में भी मिल जाएंगी। वहीं, कुछ चिकित्सक तो ऐसे भी हैं जो मरीज की आर्थिक स्थिति देखकर अपने पास से सैंपल भी उसे दे देते हैं।

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आरटीआइ कार्यकर्ता ने एकत्र की पर्चियां व बिल

सदरपुर के एक आरटीआइ कार्यकर्ता ने महंगी दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों की पर्चियां व कुछ बिल एकत्र किए हैं। इनमें ज्यादातर पर्चियां साधारण बीमारी से पीड़ित मरीजों की हैं और बिल 800 से 1000 रुपये के बीच का है। ज्यादातर बिल एक ही दुकान के हैं। आरटीआइ कार्यकर्ता का कहना है कि वह इस मामले जल्द जनहित याचिका दायर करेंगे।

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व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसी तरह किसी भी व्यक्ति को अधिकार है कि वह किसी भी दुकान से दवा खरीद सकता है। इसके लिए चिकित्सक निर्धारित दुकान से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना संविधान के विरुद्ध है।

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