यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
35साल में भी वे अब बन सकेंगी मां
तमाम ऐसी महिलाएं हैं, जो कॅरियर को मनवांछित ट्रैक पर ले आने के बाद ही शादी करना चाहती हैं, लेकिन ...और पढ़ें

तमाम ऐसी महिलाएं हैं, जो कॅरियर को मनवांछित ट्रैक पर ले आने के बाद ही शादी करना चाहती हैं, लेकिन इन सब महत्वाकांक्षाओं के पूरा होने में उनकी उम्र लगभग 30 से 35 के पार जा पहुंचती है। ऐसी महिलाओं को मां बनने में कई दिक्कतें पेश आ सकती हैं, लेकिन आधुनिक विज्ञान में हुई प्रगति के कारण अब ऐसी महिलाएं 35 से 40 की उम्र में भी मां बन सकेंगी। कैसे संभव है यह ..?
जब किसी महिला का जन्म होता है, तो वह एक निश्चित और सीमित संख्या में अंडाणुओं(एग्स) के साथ पैदा होती है। वह चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन वह अंडाणुओं की संख्या में वृद्धि नहीं कर सकती। हालांकि प्रकृति ने महिला के शरीर को इस तरह से बनाया है कि वह 30 साल की उम्र से पहले ही आदर्श मातृत्व प्राप्त कर सके।
मातृत्व और बढ़ती उम्र
35 साल की उम्र के बाद शारीरिक असामान्यताओं के साथ बच्चों के जन्म लेने की आशंकाएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा मां बनने की उम्र में वृद्धि होने के कारण गर्भपात, गर्भधारण में परेशानी, प्रसव में कठिनाई और आम तौर पर ऑपरेशन के द्वारा शिशु के पैदा होने की आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं।
मां बनने की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है। वैसे-वैसे फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस जैसी प्रजनन तंत्र के मार्ग की अन्य समस्याओं के होने की संभावनाएं भी बढ़ती जाती हैं। इस स्थिति में गर्भ धारण करने से पहले इन समस्याओं का समाधान आवश्यक हो जाता है।
एग बैंकिंग व ओवेरियन टिश्यू बैंकिंग
इन दोनों ही बैंकिग के लिए ऐसे अस्पताल की जरूरत होती है, जहां पर 'एग बैंकिंग' (बाद में आईवीएफ के लिए समय पर अंडाणु या एग को फ्रीज करना) की सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके अलावा ओवेरियन टिश्यू बैंकिंग (बाद में डिंबग्रंथि प्रत्यारोपण और सामान्य गर्भावस्था के लिए समय पर अंडाशय को फ्रीज करना) की सहूलियतें भी उपलब्ध हों। इन सहूलियतों की उपलब्धता के कारण ही महिलाएं अपनी उम्र की चिंता किए बगैर अपना मातृत्व जीवन शुरू कर सकती हैं। हमारे पास टोटल लैप्रोस्कोपिक यूनिट है,जहां फाइब्रॉएड (यहां तक कि लैप्रोस्कोपिक यूटेराइन आर्टरी लाइगेशन के साथ फाइब्रॉएड की पुनरावृत्ति की रोकथाम सहित), एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस आदि सभी तरह की प्रजनन संबंधी समस्याओं का इलाज लैप्रोस्कोपी की मदद से किया जाता है। इस कारण ओपन सर्जरी की तरह घाव को भरने में लगने वाला कीमती समय जाया नहीं होता और उस महिला को 'की होल सर्जरी' की मदद से गर्भ धारण के लिए जल्द से जल्द तैयार किया जाता है।
हम हालांकि 'एग बैंकिंग' और 'ओवेरियन टिश्यू बैंकिंग' और ओवरी प्रत्यारोपण कर सकते हैं, लेकिन फिर भी हम महिलाओं को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं करने और 30 साल से पहले बच्चे पैदा करने की सलाह ही देंगे।
ओवेरियन टिश्यू बैंकिंग ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत पूरे अंडाशय (या अंडाशय के एक भाग) को सर्जरी के द्वारा हटा दिया जाता है और अंडाणु को रखने वाली बाहरी सतह (कॉर्टेक्स) को बाद में उपयोग के लिए स्ट्रिप्स में फ्रीज रखा जाता है। अंडे को फ्रीज रखने से महिलाओं को अपनी प्रजनन क्षमता को कायम रखने में मदद मिलती है। यह सहूलियत उन्हें अपनी जैविक घड़ी(बॉयो-क्लॉक) की चिंता किए बगैर परिवार शुरू करने का विकल्प प्रदान करती है। डॉक्टर ऐसे अंडाणुओं को पुन: प्राप्त कर विट्रिफिकेशन नामक नवीनतम प्रक्रिया को अंजाम देकर उन्हें फ्रीज कर सकते हैं। फ्रीज किये हुए अंडाणुओं को तरल नाइट्रोजन से भरे कांच के टैंक में तब तक सुरक्षित रखा जाता है, जब तक अमुक महिला गर्भ धारण करने के लिए उनके इस्तेमाल की इच्छा जाहिर न करें।
(डॉ.निकिता त्रेहन,स्त्रीरोग विशेषज्ञ-लैप्रोस्कोपिक सर्जन,दिल्ली)
