यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शीतल पेय से बढ़े किडनी स्टोन के मामले
ठंडे पेय को पानी का विकल्प बना देने के कारण युवाओं में किडनी स्टोन के मामलों में खतरनाक बढ़त देखी ...और पढ़ें

ठंडे पेय को पानी का विकल्प बना देने के कारण युवाओं में किडनी स्टोन के मामलों में खतरनाक बढ़त देखी जा रही है। कम पानी पीने के अलावा फैट और काबरेहाइड्रेट युक्त आहार प्रमुखता से लेने के कारण भी स्टोन की समस्या बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन के 30 प्रतिशत मरीजों की आयु 25 से 35 के बीच है। आजकल किशोरों और युवाओं में खाने के साथ सॉफ्ट डि्रंक लेने का चलन बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह चलन स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। उनके अनुसार, इस तरह की जीवनशैली के कारण लोगों में कम उम्र में ही किडनी स्टोन की समस्या बढ़ी है। सूखे मेवे, चॉकलेट और जंक फूड का उपयोग समस्या को और गंभीर रूप दे रहा है। हालाकि, किडनी में स्टोन बनने का कोई स्थायी नुकसान नहीं होता है, लेकिन कुछ वक्त के लिए कार्यक्षमता पर खासा असर पड़ता है, खासतौर पर घर से दूर रहने वाले युवाओं पर। पर्याप्त पानी पीना, हरी सब्जिया और दूध लेना व जंक फूड खाने से बचना इसकी रोकथाम के उपाय हैं।
क्या है किडनी स्टोन: यह किडनी के भीतर कैल्शियम ऑक्जलेट नामक पदार्थ का कड़ा जमाव है। इसके कारण पसली के नीचे व किनारे की ओर तेज दर्द होता है। दर्द रुक-रुककर और घटता-बढ़ता रहता है। यूरिनेशन में दर्द, उल्टिया या जी मिचलाना जैसे लक्षण सामान्यत: दिखाई पड़ते हैं।
वैसे तो खाने के बीच पानी भी कम से कम पीना चाहिए, जबकि युवा शीतल पेय का अधिक उपयोग कर रहे हैं। वहीं वे दिनभर में आवश्यकता से भी कम पानी का सेवन कर रहे हैं। इस वजह से शरीर के भीतर ऑक्जलेट स्टोन बनने लगा है, जो किडनी स्टोन का कारण है। इसके अलावा प्रोटीनयुक्त आहार अधिक मात्र में लेने पर शरीर से यूरिक एसिड का स्त्रव अधिक होता है, जो इसका कारण बनता है। कम पानी, ठंडा पेय, अधिकाधिक प्रोटीनयुक्त आहार, जंक फूड, सोया सॉस जैसे खानपान को अपनाने के कारण 25 से 35 के बीच के मरीज ज्यादा आ रहे हैं।
डॉ. अतुल गोस्वामी, वरिष्ठ कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, मैक्स अस्पताल1
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