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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जलने पर बस पाच दिन में त्वचा प्रत्यारोपण

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Published: Sat, 08 Feb 2014 12:47 PM (IST)

देश के सबसे बड़े बर्न यूनिट सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग में आगजनी की घटनाओं में जलने वाले मरीजों का ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बर्न यूनिट सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग में आगजनी की घटनाओं में जलने वाले मरीजों का इलाज और आसान हो गया है। अब मरीज का घाव सूखने के लिए तीन से चार सप्ताह इंतजार नहीं करते, बल्कि पाच दिन में ही त्वचा प्रत्यारोपण कर दिया जाता है। इस नई तकनीक से बर्न के मरीजों को जल्दी राहत मिल जाती है।

यह जानकारी सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी नारायण ने दी। नई तकनीकों से बर्न के मरीजों का इलाज आसान हो गया है। पहले जलने पर महीने तक घाव सूखने का इंतजार करते थे। अब ऐसा नहीं है। मशीन से शरीर के जले हुए हिस्से को रगड़ दिया जाता है। इससे मरीज के जले हुए हिस्से का पाच दिन में ही शरीर के दूसरे हिस्से से त्वचा लेकर प्रत्यारोपण कर देते हैं। डॉ. आरपी नारायण ने कहा कि आगजनी या तेजाब अटैक के मरीजों का बर्न विशेषा ही बेहतर इलाज कर सकता है। पर जागरूकता व डॉक्टरों की कमी के चलते ज्यादातर लोग जनरल सर्जन से इलाज कराते हैं। इसके चलते मरीजों का उचित इलाज नहीं मिलता। ऐसे में और बर्न यूनिट बनने चाहिए। सफदरजंग अस्पताल में हर साल नौ हजार जले हुए मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिसमें से ढाई हजार लोगों को गंभीर अवस्था में भर्ती करना पड़ता है। यह देखा गया है कि इलाज के लिए आए 90 फीसद लोग गरीब परिवारों के लोग होते हैं। इसका कारण खाना बनाने को स्टोव व छोटे सिलेंडर का इस्तेमाल है, जिससे घरों में आगजनी की घटनाएं होती हैं। जलने के इलाज पर सेमिनार में देश-विदेश के डॉक्टरों ने तकनीक व इलाज की सुविधाओं पर विचार साझा किया।राज्य क्यूरो, नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े बर्न यूनिट सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग में आगजनी की घटनाओं में जलने वाले मरीजों का इलाज और आसान हो गया है। अब मरीज का घाव सूखने के लिए तीन से चार सप्ताह इंतजार नहीं करते, बल्कि पाच दिन में ही त्वचा प्रत्यारोपण कर दिया जाता है। इस नई तकनीक से बर्न के मरीजों को जल्दी राहत मिल जाती है। यह जानकारी सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी नारायण ने दी। नई तकनीकों से बर्न के मरीजों का इलाज आसान हो गया है। पहले जलने पर महीने तक घाव सूखने का इंतजार करते थे। अब ऐसा नहीं है। मशीन से शरीर के जले हुए हिस्से को रगड़ दिया जाता है। इससे मरीज के जले हुए हिस्से का पाच दिन में ही शरीर के दूसरे हिस्से से त्वचा लेकर प्रत्यारोपण कर देते हैं। डॉ. आरपी नारायण ने कहा कि आगजनी या तेजाब अटैक के मरीजों का बर्न विशेषा ही बेहतर इलाज कर सकता है। पर जागरूकता व डॉक्टरों की कमी के चलते ज्यादातर लोग जनरल सर्जन से इलाज कराते हैं। इसके चलते मरीजों का उचित इलाज नहीं मिलता। ऐसे में और बर्न यूनिट बनने चाहिए। सफदरजंग अस्पताल में हर साल नौ हजार जले हुए मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिसमें से ढाई हजार लोगों को गंभीर अवस्था में भर्ती करना पड़ता है। यह देखा गया है कि इलाज के लिए आए 90 फीसद लोग गरीब परिवारों के लोग होते हैं। इसका कारण खाना बनाने को स्टोव व छोटे सिलेंडर का इस्तेमाल है, जिससे घरों में आगजनी की घटनाएं होती हैं। जलने के इलाज पर सेमिनार में देश-विदेश के डॉक्टरों ने तकनीक व इलाज की सुविधाओं पर विचार साझा किया।

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