यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 26, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उपद्रवियों के कहर के बाद गायब हुई मुरथल के ढाबों की रौनक
जागरण संवाददाता, मुरथल: आरक्षण आंदोलन भले ही खत्म हो गया है, लेकिन आंदोलन के दौरान बरपाए गए कहर का अ

जागरण संवाददाता, मुरथल: आरक्षण आंदोलन भले ही खत्म हो गया है, लेकिन आंदोलन के दौरान बरपाए गए कहर का असर अब ढाबों के कारोबार पर पड़ना शुरू हो गया है। हाईवे पर मचे उत्पात के बाद लंबी दूरी के वाहन चालक ढाबों पर गाड़ी रोकने से परहेज करने लगे हैं। चालक ढाबों पर रूकने के लिए गाड़ी के ब्रेक तो लगाते हैं, लेकिन जल्द ही उपद्रव को याद कर तुरंत ही स्पीड बढ़ा देते हैं। उपद्रव के बाद से ढाबों की रौनक जैसे गायब सी हो गई है। इसके साथ ही ढाबा संचालकों के चेहरों पर ¨चता की लकीरें भी साफ दिखाई दे रही है। वहीं ढाबा संचालक उस मंजर को भी याद कर कहते हैं कि भगवान ऐसा मंजर कभी दोबारा देखने को न मिले।
अपने परांठों के स्वाद के चलते देश भर मे मशहूर मुरथल के ढाबों पर एकाएक ग्राहक आधे से भी कम रह गए है।
ढाबों की ओर देख, आगे निकल जाते हैं लोग : मुरथल के ढाबों के परांठों के शौकीन लोग ढाबों को देख ब्रेक लगाते हैं, लेकिन अगले ही पल गाड़ी की स्पीड बढ़ा गंतव्य की ओर रुख कर लेते हैं। हाईवे पर स्थित मुरथल के ढाबों पर ऐसा हीं नजर एक बार नहीं, बल्कि दर्जनों बार देखने को मिला। वहीं खाली पड़े ढाबों का ²श्य एक अजीब सी खामोशी पैदा कर रहा है।
घटना से सहमे हैं संचालक : हाईवे पर हुए उपद्रव व ढाबों में तोड़फोड़ और आग के हवाले करने के प्रयास की घटना से मुरथल स्थित ढाबों के संचालक भी उभर नहीं पा रहे हैं। उसका असर अभी तक देखने को मिल रहा है। कई दिन बाद भी संचालक ढाबे खोलने से कतरा रहे हैं। घटना का ही असर है कि शुक्रवार को भी दर्जनों ढाबें बिल्कुल सुनसान नजर आए। वही सुखदेव ढाबे के संचालक अमरीक ¨सह ने घटना पर खेद जताते हुए कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि ऐसी घटना भविष्य में कभी देखने को न मिले।
बदला गया है माहौल :
ढाबे पर खाना खाने रुके अंबाला निवासी प्रवीण कहते हैं कि वह साथियों के साथ अकसर मुरथल के ढाबों पर आते-जाते रहते हैं। इससे पहले ऐसा सन्नाटा यहां कभी नहीं देखा। पहले लाइन में इंतजार करना पड़ता था। पिछले महीने भी ढाबे पर आया था, लेकिन जाट आंदोलन के बाद अब माहौल बदल सा गया है।
