यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हरियाणा में भाजपा के लिए चुनावी जमीन तैयार कर गए शाह
हरियाणा के तीन दिवसीय दौरे में अमित शाह ने सियासी जमीन तैयार की। शाह ने दो दर्जन समीक्षा बैठकों में संगठन और बूथ की मजबूती पर जोर दिया।

रोहतक [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा की धरती पर कदम रखने से लेकर वापसी तक सिर्फ काम और काम। संगठन की मजबूती की चिंता हो या फिर पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की रणनीति। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने तीन दिन के दौरे में इन दोनों चीजों पर पूरा फोकस रखा। कहीं खाप तो कहीं जाटलैैंड के नाम से मशहूर रोहतक लगातार तीन दिन हरियाणा की राजनीति का केंद्र बिंदु बना रहा। यहां से निकला राजनीतिक संदेश सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ राज्य के विपक्षी दलों कांग्रेस, इनेलो और आम आदमी पार्टी तक को चौकन्ना कर गया।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने तीन दिन के हरियाणा प्रवास के दौरान संगठन और सरकार को पूरी तरह से मथ डाला। संगठन और सरकार के लोगों के साथ करीब दो दर्जन बैठकों में शाह ने आगे की बात की। यानी जो हो चुका, वह तो करना ही था, लेकिन उससे भी अधिक की दरकार है। बूथ कमेटियों के कामकाज पर शाह का खास फोकस रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हरियाणा के प्रभारी थे, तब उन्होंने बूथ मैनेजमेंट का फॉर्मूला दिया था। मोदी की सोच थी कि बूथ मजबूत होगा तो पार्टी मजबूत होगी।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उसी फार्मूले पर चले। उन्हें बूथ कमेटियों पर उम्मीद के मुताबिक नतीजे नजर नहीं आए, लेकिन साथ ही कहा कि अभी थोड़ा वक्त बाकी है। इसलिए बूथ को मजबूत कीजिए, सरकार फिर से बनना तय है। सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बनाने पर भी शाह का विशेष फोकस रहा। मंत्रियों से उनकी परफॉर्मेंस तो पूछी ही, साथ ही कहा कि सिर्फ इतने भर से काम चलने वाला नहीं है। उन्हें कुछ ऐसे नतीजे देने होंगे, जिन्हें पाकर प्रदेश के लोगों को लाभ हासिल हो सके।
शाह की तीन दिन की पूरी कसरत चुनावी तैयारी पर आधारित रही। अनौपचारिक बातचीत में शाह ने स्वीकार भी किया कि संगठन को अभी मजबूत किए जाने की जरूरत है और सरकार ठीक काम कर रही है। शाह ने सरकार की राह में रोड़ा बन रहे कुछ असंतुष्ट विधायकों को भी आईना दिखा दिया। ऐसा नहीं था कि शाह उनकी नाराजगी या मुद्दे से सहमत नहीं हैैं, मगर वह चाहते हैैं कि जो अच्छे काम हुए हैैं, उन्हें दूसरे राज्यों में आदर्श के रूप में पेश किया जाए और विधायक फिर से अपनी सरकार को सत्ता में लाने के लिए काम करें।
भाजपा अध्यक्ष के इस संकेत के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल मजबूत होकर उभरे हैैं। अब वे बिना किसी दबाव के अपने ढंग से सरकार चलाएंगे। बंद कमरे में हुई मीटिंग में शाह ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी यह संदेश दिया कि सभी को साथ लेकर चलो। भविष्य में इसके अच्छे नतीजे आने की संभावना जताई जा सकती है।
भाजपा अध्यक्ष ने अपने दौरे में हुड्डा और चौटाला को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। स्वर्गीय मुख्यमंत्री बंसीलाल की तारीफ जरूर की। बंसीलाल को हरियाणा में विकास पुरुष की मान्यता हासिल है। उनकी तारीफ कर शाह ने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
हारी सीटें जिताकर साबित करनी होगी विधायकों व मंत्रियों को परफॉर्मेंस
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़े ही राजनीतिक अंदाज में विधायकों और मंत्रियों को अलग काम पर लगा दिया। उन्होंने सभी विधायकों की अपने बूते जीत हासिल करने की गलतफहमी दूर करते हुए पिछले चुनाव में हारी 43 विधानसभा सीटें जीतने की जिम्मेदारी तय कर दी। शाह ने फार्मूला दिया कि जिन 47 विधानसभा सीटों पर विधायक जीतकर आए हैैं, वे सभी पिछली हारी हुई 43 सीटों में से एक-एक पर जिम्मेदारी ले लें। यानी विधायक अपनी परफॉर्मेंस दिखाएं। पार्टी की वजह से वे विधायक बने हैैं। यदि उन्हें लगता है कि उनमें कुछ खास बात है तो वे दूसरी हारी हुई सीट जिताकर अपनी परफॉर्मेंस साबित करें। अगले साल 15 जनवरी तक इसका पूरा ब्लू प्रिंट तैयार किया जाना है।
टिकट चाहिए तो मनोहर के साथ कदमताल जरूरी हो गया
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरे से मुख्यमंत्री मनोहर लाल को मजबूती मिली है। शाह ने बंद कमरे में मुख्यमंत्री को भले ही कोई भी संदेश दिया हो, लेकिन सार्वजनिक तौर पर उनके कामकाज की तारीफ करते हुए पीठ पर हाथ रख दिया, जिसका साफ संदेश है कि मनोहर लाल ही चेहरा हैैं और सभी को उन्हें स्वीकार करते हुए आगे बढऩा है। शाह के इस संकेत के बाद बागियों के तेवर में ढीलापन आएगा और अगली बार टिकट दिलाने और काटने में मनोहर लाल की खास भूमिका रहने वाली है।
