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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 18, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पासबुक से यूरिया, बैंक खाते में सब्सिडी

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Published: Sun, 18 Jan 2015 01:07 AM (IST)

महेश कुमार वैद्य, रेवाड़ी: सब्सिडी वाली यूरिया अगले वर्ष से उद्योगों तक नहीं पहुंच पाएगी। किसानों के

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महेश कुमार वैद्य, रेवाड़ी: सब्सिडी वाली यूरिया अगले वर्ष से उद्योगों तक नहीं पहुंच पाएगी। किसानों के लिए पिछले वर्ष से अधिक खाद मुहैया करवाकर भी फजीहत झेल रही मनोहर सरकार सब्सिडी के दुरुपयोग पर पूर्ण अंकुश लगाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री ओपी धनखड़ का कहना है कि अगले वर्ष तक यूरिया वितरण की नई व्यवस्था विकसित हो जाएगी। रसोई गैस और बैंक की तरह हर किसान के पास खाद के लिए भी पासबुक होगी।

बिना सब्सिडी के महंगी है यूरिया

उद्योगों में यूरिया का उपयोग आश्चर्य नहीं है। फर्क सब्सिडी एवं बिना सब्सिडी का है। सब्सिडी पर 50 किलो यूरिया का बैग 271 रुपये में उपलब्ध है जबकि बिना सब्सिडी कीमत लगभग 800 रुपये है। जैसे कुछ होटल-ढाबों पर कामर्शियल की जगह घरेलू रसोई गैस का चोरी से उपयोग होता है, वैसे ही सब्सिडी की खाद की कालाबाजारी हो रही है।

कई उद्योगों में इस्तेमाल

बर्तन, प्लाई बोर्ड, कामर्शियल एड्हेसिव, फाइबर बोर्ड, चीनी बर्तन, सिगरेट, कास्मेटिक इंडस्ट्रीज व जूता सहित विभिन्न उद्योगों में यूरिया प्रयुक्त होती है। सूत्रों का कहना है कि काले बाजार में सब्सिडी की खाद 400 से 500 रुपये प्रति बैग पहुंचती है। इस बार भी खूब कालाबाजारी हुई है। भिवाड़ी, यमुनानगर व फरीदाबाद सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में यूरिया का उपयोग होता है।

उद्योगों को लाइसेंस जारी

यूरिया का इस्तेमाल प्रतिबंधित नहीं है। किसानों का हक मारा जाना जरूर चिंताजनक है। औद्योगिक उपयोग के लिए लाइसेंस भी दिया जाता है। यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा 46 प्रतिशत होती है। अमोनियम नाइट्रेट युक्त यह खाद बर्तनों को चमकाने में भी उपयोग में लाई जाती रही है। यद्यपि आवश्यक वस्तु अधिनियम के कारण चोरी का खेल पूरी सावधानी से खेला जाता है।

आगे नहीं बढ़ता मामला

कभी कभार कुछ बैग पकड़े भी जाते हैं तो मामला आगे नहीं बढ़ पाता। रेवाड़ी में कुछ दिन पहले ही राजस्थान जा रही खाद से भरी दो पिकअप पकड़ी गई थी, लेकिन जांच की आंच अभी तक चालक से आगे नहीं बढ़ी।

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छापामारी से लगा अंकुश : धनखड़

कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के अनुसार सब्सिडी की खाद का दुरुपयोग रोकने के लिए औद्योगिक इकाइयों व दूसरे स्थानों पर भी छापेमारी की गई है। दुरुपयोग पर काफी हद तक अंकुश भी लग चुका है। इस बार का संकट पिछली कांग्रेस सरकार की नीतियों, समय रहते स्टाक का प्रबंध न होने व कमजोर प्रबंधन तंत्र के कारण रहा। अब तक पिछले वर्ष से 70 हजार मीट्रिक टन अधिक खाद आवंटित की गई है। उन्होंने जागरण को बताया कि जल्द ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है कि गैस व बैंक पासबुक की तरह खाद की भी पासबुक होगी। किसानों के साथ-साथ उद्योगों की आवश्यकता भी पूरी की जाएगी।