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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बदल रहा जाट आंदोलन का स्वरूप, मंत्रियों की जिम्मेदारी बढ़ी

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Sun, 05 Feb 2017 05:47 PM (IST)Updated: Sun, 05 Feb 2017 05:57 PM (IST)

जाट आंदोलन को लेकर मिल रही खुफिया रिपोर्टों के कारण सरकार सजग हो गई है। स्थिति को काबू करने के लिए सरकार ने अपने मंत्री फील्ड में उतार दिए हैं।

बदल रहा जाट आंदोलन का स्वरूप, मंत्रियों की जिम्मेदारी बढ़ी
बदल रहा जाट आंदोलन का स्वरूप, मंत्रियों की जिम्मेदारी बढ़ी

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र नजदीक आने के साथ ही जाट आरक्षण आंदोलन का स्वरूप बदलता जा रहा है। खुफिया तंत्र ने सरकार को आंदोलन के गति पकड़ने की रिपोर्ट दी है। स्थिति को काबू करने के लिए सरकार ने अपने मंत्री फील्ड में उतार दिए। कुछ मंत्री उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गए तो कुछ ने हरियाणा में मोर्चा संभाल लिया है।

मनोहर कैबिनेट के कुछ मंत्री ऐसे भी हैैं, जो सिर्फ इसलिए चुप्पी साधे बैठें, क्योंकि उन्हें लग रहा कि आंदोलन को काबू करना जाति विशेष के मंत्रियों की ही जिम्मेदारी है। मंत्रियों के बीच चल रही इस तनातनी से आंदोलन को काबू करने में दिक्कतें आ सकती हैैं। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने 11 फरवरी के बाद धरने बढ़ा देने का एलान किया है। इस घोषणा को यदि हलके में लिया गया तो परेशानी बढ़ सकती है। खुफिया रिपोर्ट के बाद आधा दर्जन मंत्री फील्ड में पहुंच गए हैं।

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वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ पहले से फील्ड में हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जहां जा रहे हैैं, वहीं आंदोलनकारियों को शांति की सलाह दे रहे हैं। शहरी निकाय मंत्री कविता जैन और भाजपा मीडिया विभाग के चेयरमैन राजीव जैन ने सोनीपत, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने फतेहाबाद व सिरसा, मुख्य संसदीय सचिव डॉ. कमल गुप्ता ने हिसार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कुरुक्षेत्र-कैथल में मोर्चा संभाला हुआ है।

हमने जो वादे किए, सभी पूरे किए

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला का कहना है कि पिछले साल हुए आंदोलन के समय सरकार ने जो वादे किए थे, उन सभी को तय समय में पूरा किया है। विधानसभा में कानून बनाकर जाटों सहित छह जातियों को आरक्षण दिया। मामला उच्च न्यायालय में चला गया, जिसकी पैरवी सरकार द्वारा मजबूती से की जा रही है। जाट नेताओं की मांगों के अनुरूप सरकार ने सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया और उनके आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की है।

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