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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खसरा से एक बच्चे की मौत, 400 चपेट में

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Published: Fri, 16 May 2014 01:06 AM (IST)

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रणविजय सिंह, नई दिल्ली

दिल्ली में संक्रामक बीमारी खसरा (मीजल्स) से एक बच्चे की मौत हो गई है, जबकि 400 से अधिक बच्चे इसकी चपेट में आ चुके हैं। छुआछूत से होने वाली इस बीमारी के तेजी से पांव पसारने से स्वास्थ्य एजेंसियों में हड़कंप मचा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इसको लेकर चिंतित है। ऐसे में तेज बुखार, सर्दी जुकाम व शरीर पर लाल दाने निकल आएं तो उसे नजरअंदाज नहीं करें।

डॉक्टरों के अनुसार खसरा वायरस से फैलता है। इसका वायरस सांस के जरिए फेफड़े में पहुंचता है। इसने इस साल की शुरुआत से ही आतंक मचा रखा है। मार्च से मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। उत्तर भारत के एकमात्र संक्रामक अस्पताल महर्षि वाल्मीकि संक्रामक अस्पताल में जनवरी से लेकर मार्च तक 363 मरीजों में खसरा की पुष्टि हुई है। अप्रैल का आंकड़ा अभी तैयार नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि मरीजों की संख्या 400 के पार निकल चुकी है। पांच साल में इतने बड़े पैमाने पर खसरा की बीमारी नहीं देखी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कर्मचारियों ने भी अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। खसरा पीड़ित बच्चों के खून के सैंपल जांच के लिए लिए जा रहे हैं। राजधानी के मुकुंदपुर, मुस्तफाबाद, करावल नगर आदि इलाकों में इसका प्रकोप ज्यादा है। यहां उत्तर प्रदेश व बिहार से भी खसरा पीड़ित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

टीकाकरण पर उठे सवाल

खसरा के रोकथाम के लिए बच्चों को इसका टीका दिया जाता है। पहला टीका नौवें महीने व दूसरा 16वें महीने में लगता है। ऐसे में बड़े पैमाने पर बीमारी फैलने के कारण टीकाकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि मरीजों में ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्हें टीका नहीं लगा है।

बचाव के उपाय

-मरीज को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें

-मरीज के गिलास का इस्तेमाल न करें

-इसका वायरस हवा में रहता है, ऐसे में नाक व मुंह को ढंक कर रखें

पांच साल में जनवरी से मार्च तक के मामले

वर्ष 2010- 11- 12- 13- 14

जनवरी 23- 45- 76- 23- 84

फरवरी 57- 63- 45- 33- 88

मार्च 168- 94- 96- 117- 191

कुल- 248- 202- 217- 173- 363

पिछले पांच साल में सामने आए कुल मामले

वर्ष मामले

2010 1007

2011 799

2012 620

2013 560

2014 363 (जनवरी से मार्च तक)