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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ISI की नापाक साजिश, भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना है मकसद

By Amit MishraEdited By:
Published: Sat, 29 Oct 2016 07:36 AM (IST)Updated: Sun, 30 Oct 2016 10:15 AM (IST)

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने में लगी है। एजेंट बांग्लादेश और नेपाल बार्डर के रास्ते भारत में नकली नोट भेज रहे हैं।

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नई दिल्ली [संतोष शर्मा]। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है। इसके एजेंट बांग्लादेश और नेपाल बार्डर के रास्ते भारत में बड़ी संख्या में नकली नोट भेज रहे हैं। केवल दिल्ली में इस वर्ष आधा दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच दस से अधिक तस्करों को गिरफ्तार कर लाखों के नकली नोट बरामद कर चुकी है।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक आइएसआइ नोट बनाने के तरीको को परिष्कृत कर रही है। इस वजह से असली व नकली नोट में फर्क करना मुश्किल है। लोग नकली नोटों की जल्द पहचान न कर सकें, इसलिए तस्करों को इन्हें छोटे-छोटे स्थान और भीड़भाड़ वाले साप्ताहिक बाजार आदि में खपाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

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आइएसआइ द्वारा बनाए गए 100 रुपये के नकली नोट पाकिस्तान से करीब 20 रुपये की कीमत पर भारत भेजे जाते है। भारत आकर इसकी कीमत 40 से 50 रुपये तक हो जाती है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गत दिनो गिरफ्तार किए गए दो तस्करो ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होने 100 रुपये के नकली नोट के लिए 42 रुपये पाकिस्तानी गिरोह को दिए थे। इस प्रकार एक नोट को चलाने पर तस्कर को आधे से भी ज्यादा का मुनाफा होता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नेपाल व बांग्लादेश बार्डर पर कई जगह बाड़ नहीं लगी है। सुरक्षा व्यवस्था भी पाकिस्तान बार्डर के मुकाबले कम कड़ी है। लिहाजा तस्कर थोड़े से प्रयास में ही नकली नोट की तस्करी में सफल हो जाते है। भारत आने के बाद नकली नोटों को बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के रास्ते सड़क या रेल मार्ग से उत्तर-भारत के अन्य राज्यों में लाया जाता है। तस्करी में ऐसे लोग लिप्त रहते हैं जो बेरोजगार और अपराधी किस्म के हैं।

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नकली नोट चलाने का खास तरीका

पहला

कम मूल्य का सामान लेकर बड़ा नोट दुकानदार को देना, जिसके बदले असली नोट मिल जाते हैं।

दूसरा

नकली नोटों को गड्डियों के बीच में रखकर चला देते हैं।

इन घटनाओं से भारतीय अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान हो रहा है। पुलिस के आंकड़ोंं के मुताबिक वर्ष 2011 मे जहां राजधानी में 28.20 लाख रुपये मूल्य के नकली नोट पकड़े गए थे। वहीं, 2015 में यह आंकड़ा 5.29 करोड़ रूपये से ज्यादा हो गया।

इस वर्ष धरे गए तस्कर

27 अक्टूबर-स्पेशल सेल ने पाकिस्तान में बने नकली नोट के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया।
3 अक्टूबर-स्पेशल सेल ने दो को धरा, 3 लाख मूल्य के नकली नोट बरामद।
20 जुलाई-स्पेशल सेल ने दो को किया गिरफ्तार, 3 लाख रुपये बरामद।
8 जुलाई-क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान से आए नकली नोट की तस्करी करने वाले गिरोह के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया। 2 लाख की नकदी बरामद।
1 जुलाई-स्पेशल सेल ने बांगलादेश के रास्ते आए नकली नोट चलाने वाले 4 तस्करों को गिरफ्तार किया, 10.25 लाख मूल्य के नकली नोट बरामद।
5 -क्राइम ब्रांच ने एक को धरा, 2.5 लाख के नकली नोट बरामद