यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जानलेवा प्रदूषणः गंदी हवा में सांस लेने के लिए मजबूर 90 फीसद लोग
हवा में घुलते जहर को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो तबाही आ सकती है। तेजी से बढ़ते प्रदूषण ...और पढ़ें

नई दिल्ली (जेएनएन)। हवा में घुलते जहर को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो तबाही आ सकती है। तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते दुनियाभर में हर साल से अधिक लोगों की मौत हो रही है। हाल यह है कि आज पूरे विश्व में करीब 90 फीसद लोग गंदी हवा सांस लेने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों की बड़ी संख्या भारत में है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में काफी संख्या में लोग ऐसे हैं, जो मानकों के अनुरूप हवा में सांस नहीं ले पाते। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पीएम 2.5 पर ध्यान देना इसलिए जरूरी है, क्योंकि हवा में घुले ये अतिशूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं।
मानव के बाल के 30वें हिस्से से छोटे ये कण सांसों के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं। इसके चलते ही फेफड़ों का कैंसर और दिल की जानलेवा बीमारी होती है।
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डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट ‘एम्बीएंट एयर पॉल्युशन
ए ग्लोबल एसेसमेंट ऑफ एक्सपोजर एंड डिजीज’ के अनुसार, वायु प्रदूषण से दुनियाभर में हर साल लोगों की मौत होती है। दक्षिण-पूर्व एशिया में लगभग आठ लाख लोगों की मौत इसके चलते होती है। वहीं विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि दुनियाभर में 2013 में 55 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हुई।
इस रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के चलते पूरी दुनिया को डालर (14,85,000 करोड़ रुपये) की आर्थिक हानि हुई। यह रकम भारत सरकार के सालाना आम बजट की तीन चौथाई के बराबर है। दक्षिण एशियाई देशों में हर साल सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक फीसद के बराबर आर्थिक नुकसान हो रहा है।
