यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
असोला भाटी में मिली मकड़ी की नई प्रजाति
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली : असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में मकड़ी की एक नई प्रजाति का पता चल

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली : असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में मकड़ी की एक नई प्रजाति का पता चला है। इस मकड़ी के मुख की बनावट और रंग हिंदू देवता भगवान जगन्नाथ के मुख से मिलते हैं। इसलिए इसका नाम भी एस. जगन्नाथाए रखा गया है। गुरुगोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय केशरी दास और उनके छात्रों की टीम ने इसकी खोज की है। उनका शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंस एंड रिसर्च (आइजेएसआर) में प्रकाशित हुआ है। इसका वर्ल्ड स्पाइडर कैटलॉग (डब्ल्यूएससी) ने भी अनुमोदन किया है। स्विटजरलैंड के बर्न स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम इस कैटलॉग को संचालित करता है। इस नई खोज से मकड़ी की प्रजातियों की संख्या बढ़कर 45,654 हो गई है। भारत में मकड़ी की कुल 1,684 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 1997 में दिल्ली में मकड़ी की 11 प्रजातियों को रिकॉर्ड किया था। इस सूची को 2012 में डॉ. संजय केशरी दास ने अपडेट किया। जिसके बाद दिल्ली में मकड़ी की प्रजातियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। डॉ. दास ने बताया कि अरावली पर्वत श्रृंखला अपनी अनूठी जैवविविधता के लिए मशहूर है। असोला भाटी इसी क्षेत्र में आता है। नर मकड़ी एस जगन्नाथाए की लंबाई 3.75 मिलीमीटर है। इसी प्रजाति की मादा मकड़ी इसके लगभग दोगुना यानी 6.50 मिलीमीटर लंबी है। मकड़ी की अन्य प्रजातियों की तरह इस नई प्रजाति के आगे वाले भाग में दो बड़ी काली आखें हैं। यह कार की हेडलाइट जैसी दिखती हैं। इसके उदर पर तीन सफेद निशान और कई सफेद लाइनें हैं। यह चीटिया और छोटे कीड़े-मकोड़ों को खाती हैं। तेजी से दौड़ने व लंबी छलांग लगाने की क्षमता के कारण इसे जंपिंग स्पाइडर भी कहा जाता है।
