विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

होश उड़ाने वाला सच: आखिर क्या देखकर होता है टीम इंडिया में सेलेक्शन?

By Edited By:
Published: Tue, 08 Oct 2013 10:54 AM (IST)Updated: Wed, 09 Oct 2013 04:22 PM (IST)

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। अभी कुछ ही दिनों पहले किसी क्रिकेट ट्रेनिंग स्कूल के कुछ युवा क्रिकेटर चाय की दुकान ...और पढ़ें

News Article Hero Image

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। अभी कुछ ही दिनों पहले किसी क्रिकेट ट्रेनिंग स्कूल के कुछ युवा क्रिकेटर चाय की दुकान पर बातचीत करते दिखे, उनके बीच एक लड़का ऐसा था जो अपने बाकी साथियों को क्रिकेट से संबंधित तमाम ज्ञान परोस रहा था, उसकी व उसके दोस्त की बातों ने यह तो साफ कर दिया था वो उनमें सबसे प्रतिभाशाली था और शायद टीम का कप्तान भी। जब बीच-बीच में उसके दोस्त मस्ती करते हुए किसी बात पर चुटकी लेते तो वह तपाक से कहता था, 'बेटा, इंडियन टीम में जिस दिन खेलूंगा, तब हंसकर दिखाना।' फिर रविवार रात जब चैंपियंस लीग का फाइनल खत्म हुआ तो टूर्नामेंट के आंकड़ों ने मेरी नजर कुछ ऐसी चीजों पर डाली, जिसने होश भी उड़ाए और चाय की दुकान पर मिले उस लड़के की बातों और उस पर तरस भी आने लगा, क्योंकि उसका सपना सिर्फ और सिर्फ भारतीय टीम में आने का था, मुझे चैंपियंस लीग के उन आंकड़ों को देखकर उस युवा क्रिकेटर की प्रतिभा पर शक नहीं हुआ, लेकिन हां, अपनी सेलेक्श प्रक्रिया को देखते हुए उस पर तरस जरूर आया। आइए आपको भी रूबरू कराते हैं इस हकीकत से..

अभी कुछ ही समय पहले हमनें आपको अपनी दो क्रिकेट रिपोर्ट (पहली रिपोर्ट, दूसरी रिपोर्ट) में यह बताने की कोशिश की थी कि कैसे वसीम जाफर, अमोल मजूमदार, मोहित मिश्रा और परवेज रसूल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टीम में जगह नहीं मिल रही है लेकिन चैंपियंस लीग टी20 खत्म होते-होते यह बात जगजाहिर हो गई कि भारतीय क्रिकेट की सेलेक्शन प्रक्रिया वाकई गजब की है। सवाल यही है कि आखिर किन सफलताओं को देखकर भारत के लिए खेलने का सपना पूरा किया जाता है, आखिर किस चीज के दम पर टीम इंडिया में अपनी दावेदारी पेश की जा सकती है। खैर, इसका जवाब तो चयनकर्ता ही देंगे, लेकिन हम आपको दो ऐसे खिलाड़ियों से रूबरू कराते हैं जिनके ताजा आंकड़े व उनके साथ होता न्याय आपके जहन में भी तमाम सवाल खड़े कर देगा..

1. अजिंक्य रहाणे:

पिछले चार टी20 मैचों में लगातार इस खिलाड़ी के स्कोर कुछ इस प्रकार रहे हैं, 62 नॉटआउट, 52, 70 और चैंपियंस लीग फाइनल में 65 रनों की पारी। वह चैंपियंस लीग के 6 मैचों में 288 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी बने। इसके अलावा अगस्त में दक्षिण अफ्रीका 'ए' टीम के खिलाफ प्रीटोरिया में खेले गए प्रथम श्रेणी मैच की दो पारियों में 33 व 86 रनों की पारी, यह आंकड़े यहीं खत्म नहीं होते, पिछले आइपीएल सीजन के 18 मैचों में 106 के स्ट्राइक रेट से 488 रन जिसमें चार अर्धशतक शामिल रहे, वहीं अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की बात करें तो अपने आखिरी वनडे मैच में उन्होंने जिंबॉब्वे के खिलाफ उन्हीं की जमीन पर 50 रनों की शानदार पारी खेली जबकि अपने आखिरी टी20 मैच में मैनचेस्टर के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ जब वहउतरे, तब वह वहां कठिन पिच पर अर्धशतक (61) जड़ने वाले एकमात्र भारतीय थे। क्या यह आंकड़े यह बताने के लिए काफी नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय वनडे हो, अंतरराष्ट्रीय टी20 हो या फिर आइपीएल और चैंपियंस लीग..हर मौके पर इस खिलाड़ी ने अपना प्रभाव छोड़ा, लेकिन ना जाने सेलेक्टर्स के दिमाग में ऐसा क्या आया कि हाल में जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे व टी20 सीरीज के लिए टीमों की घोषणा हुई तब दोनों ही टीमों में आए दिन अपना फॉर्म खोने वाले रोहित शर्मा, इशांत और विनय कुमार जैसे खिलाड़ी तो थे, लेकिन रहाणे का नामोनिशान नहीं था।

2. प्रवीण तांबे:

तांबे चैंपियंस लीग टी20 में 4.10 के इकॉनमी रेट से सर्वाधिक 12 विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने हैं जिस दौरान उनका बेस्ट प्रदर्शन रहा महज 15 रन देकर चार विकेट। राजस्थान रॉयल्स के इस खिलाड़ी के बारे में कहने को तो बहुत कम है (क्योंकि उन्हें कभी इतना मौका ही नहीं दिया गया कि उनके बारे में कुछ पुराने आंकड़े दिए जा सकें) लेकिन जितना भी है, वो हमारे क्रिकेट प्रतिभाओं को खोजने की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए काफी है। इस खिलाड़ी को दुनिया ने तब देखा जब वह 42 वर्ष के हो गए। हैरत इस बात से है कि आज तक उन्हें फ‌र्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने तक का मौका नहीं मिला और पूरा जीवन इस खिलाड़ी को महाराष्ट्र की एक छोटी सी लीग में खेलकर गुजारना पड़ा। अब जब वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्तर पर टी20 के जरिए अपने होने व अपनी प्रतिभा का प्रमाण दे चुके हैं, क्या उन्हें अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका मिल पाएगा क्योंकि 40 की उम्र के बाद शायद सचिन ही वो खिलाड़ी होंगे जिन्हें अब तक चयनकर्ता टीम में रखने को मजबूर है, वरना भारतीय क्रिकेट टीम में इस उम्र में मैदान पर उतरना असंभव सा नजर आता है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर