यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हमारे पुरखों की धरोहर है रोहतासगढ़ किला

निज प्रतिनिधि, नौहट्टा (रोहतास) : रोहतास गढ़ हमारी जन्म स्थली है। जहां मुगल काल में मुगलों के आतंक से आदिवासी समुदाय अपनी सभ्यता व संस्कृति की रक्षा के लिए यहां से पलायन कर अन्य क्षेत्रों में चले गए। हमारे पुरखे राजा उर्गन ठाकुर, राजा प्रताप धवल, राजा ब्रह्माधवल समेत अन्य राजाओं के शासन का केन्द्र यह किला रहा है। यह हमारे पुरखों की धरोहर है। आज हम सभी अपने पुरखों की मिट्टी को नमन करने आए हैं। रविवार को रोहतासगढ़ किला तीर्थ मेला में वनवासी बंधुओं को संबोधित करते हुए वनवासी कल्याण के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदेव राम उरांव ने यह बातें कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संरक्षण के बावजूद यह किला उपेक्षा का शिकार है। आवागमन की समुचित सुविधा नहीं होने से इस दुर्ग को देखने आने वाले लोगों को घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कल्याण आश्रम द्वारा इसे तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग केन्द्र सरकार से की जा रही है। अनुसूचित जाति जन जाति आयोग के अध्यक्ष बाबू लाल टुड्डु व उपाध्यक्ष ललीत भगत ने कहा कि अगले वर्ष माघ शुक्ल सप्तमी को इस तीर्थ मेले में लोग रोपवे से आए इसके लिए हम सरकार से प्रयास करेंगे। छतीसगढ़, बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, दिल्ली, राजस्थान, मेघालय आदि राज्यों से आए आदिवासियों ने किला परिसर में अवस्थित कर्मवृक्ष की पूजा अर्चना की। भारत माता व हर-हर महादेव के जयघोष से कैमूर पहाड़ी गुंजायमान हो उठी। कैमूरांचल विकास मोर्चा द्वारा 3 मार्च से स्वामी जीवन देव महाराज के सानिध्य में आयोजित राष्ट्रीय जन सेवा सह सनातन वैदिक महायज्ञ का आज ध्वजारोहरण किया गया। इस मौके पर आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक (बिहार-झारखंड) सिद्धनाथ सिंह ने आदिवासी वीरांगना सिन्ही देई व कैली देई के स्मारिका का विमोचन किया। कल्याण आश्रम के प्रदेश अध्यक्ष डोमा सिंह खरवार, प्रांतीय संगठन मंत्री विनोद उपाध्याय, वनवासी रक्षाहित के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय सिंह, छत्तीसगढ़ के संगठन मंत्री वीरबल सिंह आदि ने भी संबोधित किया। संचालन महरंग उरांव ने किया। मौके पर सुग्रीव सिंह खरवार, रघुवंश सिंह, कामेश्वर सिंह, बबन ठाकुर सहित अन्य उपस्थित थे।
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