यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 07, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा बिहार
एक लंबे अरसे के बाद सूबे की सियासत में संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

पटना। एक लंबे अरसे के बाद सूबे की सियासत में संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को उचित समय पर विधानसभा भंग करने की अनुशंसा के लिए अधिकृत कर दिया, वहीं दूसरी तरह शरद यादव की ओर से बुलाई गई जदयू विधानमंडल दल की बैठक में मांझी को नेता पद से हटाकर नीतीश कुमार को नया नेता चुन लिया गया।
मांझी और नीतीश खेमे में सहमति नहीं बन पाने पर शनिवार को दोपहर दो बजे कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें विधानसभा को भंग कर राज्य में चुनाव कराने के लिए राज्यपाल को सही समय पर अनुशंसा भेजने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया। नीतीश समर्थक मंत्री इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकल गए। कैबिनेट में विधानसभा भंग करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री मांझी को अधिकृत कर दिए जाने के बाद अब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ गई है।
एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में कैबिनेट की हुई बैठक में कल बर्खास्त किए गए दो मंत्रियों राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और पीके शाही को छोड़ अधिकांश मंत्री मौजूद थे। बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने की अनुशंसा के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर मंत्रियों से राय मांगी। महाचंद्र प्रसाद सिंह, वृशिण पटेल, शाहिद अली खान, भीम सिंह, नीतीश मिश्र और विनय बिहारी ने प्रस्ताव का समर्थन किया; जबकि नीतीश समर्थक विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, जावेद इकबाल अंसारी, जयकुमार सिंह, मनोज कुशवाहा और बीमा भारती जैसे डेढ़ दर्जन से अधिक मंत्रियों ने प्रस्ताव का विरोध किया। बैठक के बाद नीतीश समर्थक मंत्री मुख्यमंत्री आवास से पैदल ही बाहर निकल गए।
उधर कैबिनेट की बैठक से पहले नीतीश और मांझी के बीच सुबह से ही सुलह-सफाई की कोशिश चलती रही। पहले मांझी समर्थक मंत्री (नरेंद्र सिंह और वृशिण पटेल) नीतीश कुमार के आवास पहुंचे। थोड़ी देर बाद मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी वहां पहुंचे। जदयू अध्यक्ष शरद यादव वहां पहले से मौजूद थे। करीब दो घंटे तक पार्टी के इन शीर्ष नेताओं की बैठक में कोई रास्ता नहीं निकल सका। मांझी किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री पद छोडऩे को तैयार नहीं थे। नीतीश कुमार इसके कम पर तैयार नहीं थे। तब मुख्यमंत्री मांझी भी कैबिनेट की बैठक के लिए वहां से निकल पड़े।
सूत्रों के अनुसार मांझी ने वहां से निकलने के तुंरत बाद राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को पत्र लिखकर शरद यादव के विधानमंडल दल की बैठक को असंवैधानिक करार दिया और उन्हें बताया कि विधायकों को बैठक में मुख्यमंत्री के उपस्थित रहने की बात कहकर भरमाया जा रहा है। इसलिए इस बैठक के निर्णय पर संज्ञान नहीं लिया जाए। उन्हें विधानसभा में बहुमत हासिल है और जरूरत पडऩे पर वे बहुमत साबित कर देंगे।
