यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राजनीतिक हलचल का अहसास कर रहा गांधी मैदान
शहर का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर एक बड़ी राजनीतिक जुटान के लिए तैयार है। महात्मा गांधी से लेकर ...और पढ़ें

पटना। शहर का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर एक बड़ी राजनीतिक जुटान के लिए तैयार है। महात्मा गांधी से लेकर जेपी तक के आंदोलनों को नजदीक से देख चुका गांधी मैदान अब देश की वर्तमान राजनीति से दो-चार हो रहा है। केसरिया और हरे रंग के आवरण में खुद को समेटे गांधी मैदान को शायद इसका अहसास है कि इस मैदान में देश पर सत्तासीन भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गज हाजिर हुए हैं। आज भाजपाई दिग्गज बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के रण का एलान करेंगे।
भाजपा ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मंगलवार को 'विराट कार्यकर्ता समागमÓ का आयोजन किया है। पार्टी की ओर से दो से ढाई लाख कार्यकर्ताओं की जुटान की संभावना व्यक्त की गई है। राज्य के कोने-कोने से आए लोगों को भाजपा के कद्दावर राष्ट्रीय और बिहार के नेता संबोधित करेंगे।
यहां आने वालों को गर्मी के इस मौसम में किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो, इसके लिए प्रबंधन में जुटे लोग सचेत हैं। लोगों के खाने, सोने, रहने से लेकर इलाज तक की व्यवस्था पर पार्टी नेताओं की नजर है। सोमवार की सुबह से गांधी मैदान में तैयारियों की जायजा लेने के लिए नेताओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। सबकी जबान पर पार्टी के कुछेक नेता-कार्यकर्ता के नाम आते। लालबाबू, यहां रह गए लोगों के रात्रि विश्राम के लिए व्यवस्था पूरी हुई या अभी काम बचा है? अशोक को बुलाओ, पता करो पानी के कितने टैंकर लगाए गए हैं? बर्फ की बुकिंग का क्या स्टेटस है?लोगों के जाने के बाद साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी भाजपा नेताओं का पूरा ध्यान है। मंच पर खड़े होकर नेता दूर तक दृष्टि फैलाकर यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि दूर बैठे कार्यकर्ता को भी अमित शाह और राजनाथ सिंह नजर आएंगे या नहीं? माइक ऐसा हो कि गांधी मैदान के बाहर डाकबंगला चौराहे तक लोगों को भाषण सुनने में दिक्कत न हो। पार्टी के विधायक, सांसद और नगर पार्षद तक के जिम्मे काम बंटे हुए हैं। बीच-बीच में इन्हें फोन भी जा रहा है। आपने जो जगह बुक की थी, वहां सिर्फ रात्रि विश्राम की व्यवस्था है या फिर भोजन की भी?
सवाल-दर-सवाल और उसके जवाब भी। गांधी मैदान भी बदलते दौर की राजनीति को महसूस कर रहा है। वह देख रहा है कि आज (सोमवार) उसका रूप एक बार फिर दुल्हन की तरह सजाया-संवारा जा रहा है। चकाचौंध करने वाली रोशनी से लेकर केसरिया और हरे रंग में रंगे तंबू-कनात तक ताने जा रहे हैं। बस तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कल (मंगलवार) यहां एक नए रण का बिगुल बजेगा तब गांधी मैदान स्मृतियों के पन्ने पलट कुछ महसूस करने की कोशिश कर रहा होगा।
लोगों के लिए व्यवस्था:
- पीने के ठंडे पानी के लिए दो सौ ग्राम के पाउच
- पानी के ४० टैंकर भी रहेंगे मैदान में
- अलग-अलग जगह पर सौ नल लगाए गए
- १५० शौचालय मैदान के किनारे -किनारे
- मैदान के एक हिस्से में २० से २५ हजार लोगों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था
- सांसदों-विधायकों के आवास में रात्रि विश्राम और भोजन की व्यवस्था
- डेढ़ लाख लोगों के बैठने की की गई व्यवस्था
- यातायात नियंत्रण के लिए छह जोन में बनाए गए कार्यालय
- नियंत्रण कार्यालय में मौजूद रहेंगे भाजपा कार्यकर्ता
- चार विशेष वाहन भी यातायात कंट्रोल के लिए लगाए गए
