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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 04, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बैंक हड़ताल से 15 हजार करोड़ के लेनदेन पर ताला

By Mrityunjay Kumar Edited By:
Published: Thu, 04 Dec 2014 10:50 PM (IST)Updated: Fri, 05 Dec 2014 09:09 AM (IST)

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी क्षेत्रीय हड़ताल के तहत गुरुवार को पटना सहित पूरे बिहार में बैंककर्मी हड़ताल पर रहे।

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पटना । यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी क्षेत्रीय हड़ताल के तहत गुरुवार को पटना सहित पूरे बिहार में बैंककर्मी हड़ताल पर रहे। सरकारी के साथ ही विदेशी व निजी क्षेत्र के बैंकों का भी शटर गिरा रहा। एटीएम सेवा भी ठप रही। इससे प्रदेश में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।

इसलिए हड़ताल पर रहे बैंककर्मी

बैंककर्मियों का 10वां वेतन समझौता एक नवंबर 2012 से लंबित है। अब तक इस पर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आइबीए)के बीच 16 बार वार्ता हो चुकी है। आइबीए 11 फीसद वेतन वृद्धि के प्रस्ताव पर अड़ा हुआ है, जबकि यूएफबीयू 23 फीसद वेतन वृद्धि की मांग कर रहा है।

नारेबाजी से गूंजता रहा शहर

बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालयों, मंडल कार्यालयों के साथ ही शाखाओं पर भी जमकर नारेबाजी हुई। केन्द्र सरकार के प्रति बैंककर्मियों में भारी आक्रोश था। दरअसल, इसी मुद्दे को लेकर बैंककर्मी चौथी बार हड़ताल पर हैं।

बदली रणनीति का मिला फायदा

इससे पूर्व तीन बार राष्ट्रव्यापी हड़ताल हुई थी। इस बार इसे क्षेत्रीय कर दिया गया है। दो दिसंबर से पांच दिसंबर तक चलने वाली चार दिवसीय हड़ताल का व्यापक असर इसलिए हुआ क्योंकि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दिन हड़ताल की गई। इससे एक क्षेत्र में हड़ताल होने का असर दूसरे क्षेत्र पर पड़ा। हड़तालियों की रणनीति इस मायने में कारगर रही। पटना में चेक क्लीयङ्क्षरग का काम तीन दिनों से ठप है। अब तक लगभग 350 करोड़ रुपये के चेक फंसे होने का अनुमान है।

48 हजार कर्मी रहे हड़ताल पर

बिहार में सभी बैंकों के करीब 48 हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सूबे में 5943 बैंक शाखाएं और 4878 एटीएम के जरिए सेवा नहीं मिल पाई। इसमें पटना जिले की 707 शाखाएं और 1090 एटीएम भी शामिल हैं।

अंतिम अस्त्र भी नहीं आया काम

मसले को लेकर चौथी बार हड़ताल (18 दिसंबर 2013, 10 एवं 11 फरवरी 2014, 12 नवंबर 2014, दो से पांच दिसंबर 2014) हुई है। बड़ा सवाल यह कि इस अंतिम अस्त्र के बावजूद बैंककर्मियों की समस्या जस की तस बनी हुई है।

15 हजार करोड़ का लेनदेन बाधित

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डा. कुमार अरविन्द ने कहा कि एक दिन की हड़ताल से सूबे में 15 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन बाधित हुआ है। एटीएम के जरिए प्रतिदिन 115 करोड़ की निकासी होती है, जो आज ठप रही।

निजी क्षेत्र के बैंक भी रहे बंद

बिहार प्रोविंशियल बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के संगठन मंत्री संजय तिवारी ने कहा कि हड़ताल प्रदेश में पूरी तरह से सफल रही। पटना के साथ ही भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, गया सहित सभी जिलों में बैंक बंद रहे। आज पूर्वी भारत के बिहार के साथ ही झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा सिक्किम और अंडमान निकोबार में भी हड़ताल सफल रही। बिहार में निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, आइडीबीआइ बैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक सहित अन्य बैंक भी बंद रहे। विदेशी बैंक एचएसबीसी का भी शटर गिरा रहा। अब भी अगर सरकार कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो बैंककर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। शीघ्र नई रणनीति की घोषणा होगी। बेफी के बी. प्रसाद ने कहा कि बैंककर्मी गोलबंद हैं।

यहां खुले रहे एटीएम

पटना जंक्शन स्थित भारतीय स्टेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, महाराजा कामेश्वर कॉम्पलेक्स स्थित एसबीआइ का एटीएम खुला रहा। गांधी मैदान व हथुआ मार्केट स्थित एसबीआइ का एटीएम भी खुला मिला। अघोषित रूप से पटना जंक्शन के साथ ही हवाई अड्डा, पीएमसीएच और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आसपास के एटीएम को खुला रखा गया था।

हड़ताल से सरकार को फायदा

ग्राहकों को भले परेशानी हो रही हो, केन्द्र सरकार को हड़ताल से फायदा है। एक दिन की हड़ताल से उसे करीब 150 करोड़ रुपये का फायदा हो रहा है। दरअसल, सरकार हड़तालियों का वेतन काट लेती है। चार बार में अब तक पांच दिन हड़ताल हो चुकी है। इस तरह से सरकार को 750 करोड़ रुपये की बचत हो चुकी है। दूसरी ओर बैंक यूनियनों का कहना है कि कुल मिलाकर देखें तो लेनदेन बाधित होने से सरकार को हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।

सरकार कर रही मनमानी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव शिवाजी सिंह, उमेश प्रसाद सिंह व कमलेश सिंह ने कहा है कि सभी बैंक फायदे में हैं। पर इसके कर्मचारियों एवं अधिकारियों का वेतन सबसे कम है। दो वर्ष से वेतन नहीं बढ़ाया जा रहा है। यह पूरी तरह से मनमानी है।