यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एईएस पीड़ितों को नहीं मिली एसी की ठंडक

पटना :एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) लगातार चौथे वर्ष विकराल रूप धारण कर चुका है। मुजफ्फरपुर में स्थिति नियंत्रण के बाहर होती जा रही है। दूसरी ओर प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल पीएमसीएच हकीकत से परे पूरी तरह तैयार होने का दावा कर रहा है। दैनिक जागरण में सोमवार को एईएस पर भी पीएमसीएच लापरवाह शीर्षक से छपी खबर का संज्ञान लेते हुए प्रधान सचिव स्वास्थ्य दीपक कुमार ने जमकर फटकार लगाई। इसके बाद आननफानन में इंसेफ्लाइटिस वार्ड के पंखे ठीक करा दिए गए लेकिन एसी अब भी बेकार हैं। विभागाध्यक्ष ने पांच एसी व पल्स ऑक्सीमीटर की मांग की है।
एसी की ठंडक से होता जल्द सुधार प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निगम प्रकाश नारायण ने बताया कि पीएमसीएच में प्रतिदिन सौ से अधिक बच्चे भर्ती होते हैं। गत नौ दिनों में एईएस लक्षणों वाले कुल 13 बच्चे ही भर्ती कराए गए हैं। ऐसे में पीएमसीएच में कोई विकट स्थिति नहीं है, जिसे संभालना मुश्किल हो। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि एईएस पीड़ित बच्चों को एसी के ठंडे माहौल में रखने से सुधार जल्दी होता है।
दवा आपूर्ति से संतुष्ट नहीं डॉक्टर शिशु रोग विभाग के जूनियर और सीनियर डॉक्टर दवा उपलब्धता से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि कई बार बच्चा बेहोशी की स्थिति में आता है, उसे तुरंत इलाज की जरूरत होती है लेकिन अस्पताल में दवाएं न होने से बाजार से लाने तक का इंतजार करना मजबूरी है। एईएस पीड़ितों में अतिगंभीर मरीजों के इलाज में आवश्यक तमाम दवाएं इमरजेंसी में उपलब्ध रहनी चाहिए। नर्सिग सुविधा को और चुस्त बनाने के लिए उनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
एईएस मरीजों की निगरानी शुरू प्रधान सचिव के संज्ञान लेने के बाद पीएमसीएच प्रशासन ने शिशु रोग विभाग के कर्मचारियों को हर दो घंटे में रिपोर्ट देने और एईएस मरीज के आते ही तुरंत अधीक्षक को सूचित करने को कहा गया है।
13 में किसी को नहीं जापानी इंसेफ्लाइटिस
जापानी इंसेफ्लाइटिस के सघन टीकाकरण अभियान का फायदा रोगियों में देखने को मिल रहा है। मस्तिष्क ज्वर के लक्षण वाले गत नौ दिनों में भर्ती 13 बच्चों में से किसी के जेई पाजिटिव नहीं आया है। हैरानी की बात यह भी है कि 13 में से कोई बच्चा रेफर होकर या तेज बुखार की शिकायत के साथ भी भर्ती नहीं हुआ है। इसका फायदा उठाते हुए पीएमसीएच प्रशासन का दावा है कि जो आठ बच्चे वर्तमान में पीएमसीएच में भर्ती हैं, उन्हें एईएस नहीं है।
