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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विधवा महिला ने बयां किया अपना दर्द - पति निकला धोखेबाज, अब भुगत रही हूं

By Kajal KumariEdited By:
Published: Thu, 01 Dec 2016 08:43 AM (IST)Updated: Thu, 01 Dec 2016 07:33 PM (IST)

एड्स पीड़ित कुछ महिलाओं ने अपना दुख दर्द बयां किया कि बिना किसी गलती के उनके पतियों ने उन्हें एेसी सजा दी कि वे भुगत रही हैं।

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मुजफ्फरपुर [जेएनएन]। पति गए थे प्रदेश कमाने, लौटे एड्स की बीमारी लेकर। इलाज हुआ, लेकिन उनकी मौत हो गई। उनकी छोटी सी भूल का खमियाजा आज पूरा परिवार भुगत रहा है। यह दर्द सीतामढ़ी स्थित रुन्नीसैदपुर प्रखंड के एड्स पीडि़त विधवा महिला का है।

कहती हैं कि विवाह के कुछ ही माह बाद पति गांव के लोगों के साथ प्रदेश गए। लौटे तो इस बीमारी से पीडि़त थे, लेकिन उन्होंने इसकी चर्चा किसी से नहीं की। इसी क्रम में इस बीमारी से मैं भी पीडि़त हो गई। बच्चे का जन्म हुआ, वो भी इस बीमारी से ग्रस्त हो गया। समाज के लोगों से तिरस्कार मिल रहा है।

पति निकला धोखेबाज

शिवहर निवासी व चार बच्चे की एक मां की पीड़ा भी कम नहीं है। पहले पति ने छोड़ा। जीने के लिए दूसरी शादी की। उसने तरह-तरह के सपने दिखाए, लेकिन वह धोखेबाज निकला। वह पांच साल पहले से एड्स की दवा ले रहा था। उसके संपर्क में आकर मैं भी रोगग्रस्त हो गई। मेरे दो बच्चे भी इस बीमारी के शिकार हो गए। दूसरे पति अब इस दुनिया में नहीं हैं। आज मैं समाज से उपेक्षित हूं। घरवाले मेरी मदद करते हैं, जिससे मैं अभी जिंदा...।

बाहर से लेकर आते 'सौगात'

काम के सिलसिले में बाहर जाने वाले लोग क्षणिक सुख के लिए असुरक्षित यौन संसर्ग करते हैं और जानलेवा 'सौगात' लेकर लौटते हैं। एआरटी केंद्र के नोडल पदाधिकारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अकील अहमद मुमताज इस बाबत कहते हैं कि सही जानकारी के अभाव में लोग इस दलदल में फंस जाते हैं। यहां इलाज के लिए आने वाले 80 फीसद लोगों को दूसरे राज्य में काम करने के दौरान संक्रमण होता है। इसमें भी ज्यादातर ट्रक ड्राइवर व मजदूर होते हैं।

12 हजार से अधिक मरीज निबंधित

श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (एसकेएमसीएच) स्थित एआरटी सेंटर में अब तक 12 हजार से अधिक मरीज निबंधित हो चुके हैं। इसमें 2200 से अधिक मरीजों को एआरटी पर रखा गया है जबकि 4500 को स्थानांतरित किया जा चुका है। 400 से अधिक मरीज ऐसे भी हैं जो किसी कारणवश विगत तीन माह से दवा नहीं ले रहे हैं।

असुरक्षित यौन संबंध बड़ी वजह

यहां तैनात काउंसलर ने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध एचआइवी संक्रमण की सबसे बड़ी वजह है। इसके अतिरिक्त सक्रमित खून चढ़ाने, संक्रमित सुई लगने या फिर संक्रमित मां-बाप से हुए बच्चों के संक्रमित होने की आशंका होती है। जब संक्रमण का स्तर इतना अधिक हो जाता है कि शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता ही खत्म हो जाए तो इस स्थित को एड्स कहा जाता है।

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नहीं ले रहे नियमित दवा

सकेएमसीएच परिसर स्थित एआरटी सेंटर से जुड़े 400 से अधिक संक्रमित मरीज ऐसे हैं जो एआरटी छोड़ चुके हैं। वहीं प्री एआरटी सीडी-4 के 1100 से अधिक मरीज नहीं पहुंच रहे हैं। 15 नए मरीज को तत्काल दवा शुरू करने की जरूरत है, लेकिन वे भी नहीं पहुंच रहे हैं। केंद्र के डॉ. अनिल प्रसाद चंद्रा इसके लिए पत्राचार व कम्युनिटी केयर सेंटर सहित अन्य माध्यम से इन मरीजों की तलाश कर रहे हैं। यहां दवा ले रहे लगभग पांच सौ मरीजों की मौत हो चुकी है।

एसकेएमसीएच में पहुंचने वाले अधिकतर मरीज तो जिले के ही हैं। कुछ सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर के साथ-साथ पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के भी हैं।

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कहा नोडल पदाधिकारी ने

एसकेएमसीएच स्थित एआरटी सेंटर आने वाले सभी मरीजों के लिए उचित परामर्श व इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पडऩे पर भर्ती भी किया जाता है।

- डॉ. अकील अहमद मुमताज, नोडल पदाधिकारी, एआरटी सेंटर, एसकेएमसीएच