यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 02, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंसेफेलोपैथी से एक और बच्चे की मौत
जासं, मुजफ्फरपुर : गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्तर बिहार में इंसेफेलोपैथी का कहर शुरू हो गया है। एसकेएमस

जासं, मुजफ्फरपुर : गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्तर बिहार में इंसेफेलोपैथी का कहर शुरू हो गया है। एसकेएमसीएच में सोमवार को इससे पीड़ित एक बच्चे की मौत हो गई। वह शिवहर के श्यामपुर भट्हा थाना क्षेत्र के रामपुर केशव निवासी मो. मुर्तुजा साह का पुत्र मो. आशिक (1.6) था। उसे शिवहर सदर अस्पताल से गंभीर स्थिति में रेफर किया गया था। एसकेएमसीएच पहुंचते-पहुंचते उसकी स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।
इससे दस दिन पूर्व चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र के खरकी कुआं गांव निवासी भागीरथ पंडित की पुत्री शीला कुमारी (4) की मौत हो चुकी है। इस मौसम का यह दसवां इंसेफेलोपैथी पीड़ित मरीज था।
कहां से कितने पहुंचे मरीज :
अब तक पहुंचने वाले इंसेफेलोपैथी पीड़ित मरीजों में मोतिहारी जिले के चार, शिवहर के दो, सीतामढ़ी के दो एवं मुजफ्फरपुर के दो शामिल हैं। इसमें मोतिहारी एवं शिवहर के एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है।
इनका हो चुका है इलाज
सीतामढ़ी जिले के रून्नीसैदपुर थाना क्षेत्र के ओलीपुर निवासी मो. मंजर का पुत्र दिलकश आलम (4), मोतिहारी के मधुबन चौहनिया के रमेश कुमार की पुत्री अंशू कुमारी (2), राजेपुर थाना क्षेत्र के नूनीमल गांव के मुसहर राय की पुत्री नेहा कुमारी (3.6) एवं कुढ़नी के दरियापुर कफेन के मो. नईम की पुत्री नुसरत परवीन (3) एवं शिवहर के पीपराही थाना क्षेत्र के मेसुधा के बबलू पासवान की पुत्री अंजली कुमारी (10) स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
ये हैं इलाजरत :
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थाना क्षेत्र के लदौड़ा निवासी हरिकिशोर महतो की पुत्री राजा कुमार (3), मोतिहारी के मेहसी निवासी मो. मकबूल की पुत्री फरजाना खातून (2.6) एवं सीतामढ़ी के हाजीपुर बसंत के लाल बाबू सहनी के पुत्र सावन कुमार (6) इलाजरत हैं।
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ये चिकित्सक करते इलाज :
एसकेएमसीएच में इंसेफेलोपैथी पीड़ित मरीजों का शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन एवं डॉ. अरविंद कुमार के नेतृत्व में इलाज किया जाता है। इसमें डॉ. गोपाल शंकर साहनी व डॉ. जेपी मंडल अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. यूसी विद्यार्थी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. रजनीश चंद्र मिश्रा व डॉ. सुधांशु कुमार की विशेष टीम बनाई गई है। यह रोस्टर के तहत ड्यूटी पर तैनात होते हैं।
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'एसकेएमसीएच में इंसेफेलोपैथी से पीड़ित मरीजों की देखरेख की बेहतर सुविधा है। रोस्टर पर चिकित्सकों की 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। सभी जांच व आवश्यक दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं।'
डॉ. जीके ठाकुर, अधीक्षक
एसकेएमसीएच
