यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 19, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ब्रेन टिश्यू खोलेगा बीमारी का राज

मुजफ्फरपुर, हप्र : एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रॉम (एईएस) की तह तक जाने के लिए ब्रेन टिश्यू संग्रह की कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को एनसीडीसी और आरएमआरआइ पटना के विशेषज्ञों की टीम ने सीएस डॉ. ज्ञानभूषण के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। बच्चों के ब्रेन टिश्यू को निकालने में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए डीएम अनुपम कुमार से सहमति लेने पर विचार हुआ। दिल्ली टीम का नेतृत्व डॉ. मेघा तथा पटना टीम का नेतृत्व डॉ. रवि शंकर कर रहे हैं। इसके बाद टीम ने केजरीवाल अस्पताल व एसकेएमसीएच में भर्ती बच्चों के खून का नमूना संग्रह किया। 1995 से इस बीमारी का कहर है। लेकिन, अबतक इसके कारण का पता नहीं चल पा रहा है।
अबतक शोध का नतीजा सिफर
टीम लगातार शोध कर रही है। पीड़ित बच्चों के खून का नमूना संग्रह करके भेज रही है। प्रभावित गांव से मच्छर, पशुओं के स्वाब का संग्रह कर उसे भी भेजा गया। मगर, पिछले दो साल से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ रहा। आम लोगों में धारणा बन रही है कि टीम केवल घूमकर जा रही है।
एईएस पीड़ित दो बच्चे भर्ती
मुजफ्फरपुर, हप्र : मौसम में नमी के साथ एईएस के कहर में कमी आ गई है। मंगलवार को केजरीवाल में वैशाली जिले के पातेपुर के बसंत साह की पुत्री ज्योति कुमारी (2) को भर्ती किया गया। उसे एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया। वहीं अहियापुर के धीरज कुमार के पुत्र प्रिंस (3) को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया।
चिकित्सकों का मानना है कि मौसम में नरमी के पीड़ितों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन ने रोस्टर के तहत 24 घंटे चिकित्सक और कर्मचारी को ड्यूटी पर तैनात रहने का निर्देश दिया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपालशंकर साहनी ने कहा कि अगर गर्मी व उमस बढ़ी तो बीमारी का प्रकोप फिर बढ़ सकता है।
अस्पताल---मरीज----मौत
एसकेएमसीएच 69 24
केजरीवाल 75 25
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