विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एईएस से बच्चे की हालत बिगड़ी

By Edited By:
Published: Wed, 01 May 2013 01:20 AM (IST)Updated: Wed, 01 May 2013 08:31 AM (IST)

News Article Hero Image

मुजफ्फरपुर, काप्र : एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के लक्षण पर केजरीवाल अस्पताल में भर्ती मेहसी चकनगरी निवासी अमित कुमार की हालत मंगलवार को बिगड़ गई। उसे ऑक्सीजन पर रखा गया है। तेज बुखार व चमकी होने के बाद उसे रविवार को यहां भर्ती कराया गया था। वहीं पहले से केजरीवाल व एसकेएमसीएच में भर्ती चार मरीजों की हालत में सुधार होने पर दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इधर, सदर अस्पताल में भी एईएस पीड़ित बच्चों का इलाज अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। उपाधीक्षक डॉ. बीएन झा ने आधा दर्जन चिकित्सक व पारा मेडिकल स्टाफ की सूची तैयार कर प्रशिक्षण के लिए एसकेएमसीएच भेजने की कवायद में जुट गए। बुधवार से 3 हजार 7 सौ 18 कार्यकर्ता एईएस से जंग के लिए उतरेंगे। सीएस, डीपीएम व जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी के नेतृत्व में तीन टीम जागरूकता अभियान की मानेटरिंग करेगी। सीएस बुधवार को बोचहां में अभियान चलायेंगे। वहीं सभी पीएचसी में पोलियो टीकाकार का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संपन्न कर लिया गया। अस्पताल में आने वाले बच्चे की मलेरिया व कालाजार जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी अनुपम कुमार ने पूर्वी चंपारण के डीएम को मुजफ्फरपुर में चल रहे जागरुकता अभियान से अवगत कराते हुए वहां भी इस तरह के कार्यक्रम चलाने की सलाह दी।

सदर अस्पताल में कंट्रोल रूम

एईएस मरीज की सूचना या इलाज संबंधी जानकारी के लिए सदर अस्पताल में कंट्रोल रूम काम करना शुरू कर दिया है। 0621-2245030 पर डायल कर कोई भी जानकारी दी जा सकती है। कंट्रोल रूम की सीएस व डीएस मानीटरिंग करेंगे।

मुफ्त इलाज की व्यवस्था

एईएस पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। विशेषज्ञ चिकित्सक व पारा मेडिकल स्टाफ की 24 घंटे सेवा बहाल होगी।

परिजन इसका रखें ख्याल

- बच्चों को धूप में निकलने से रोकें। दोपहर में घर में रहने का करें उपाय

- रात में बच्चे को खाली पेट न सोने दें। खूब पानी पिलाते रहें

- गर्मी में कम से कम तीन समय स्नान कराना चाहिए।

- बुखार व चमकी होने पर बच्चे को सीधे अस्पताल ले जाएं। ओझागुणी व झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें। इलाज देरी से बच्चे के जान पर हो सकता है खतरा

- तेज बुखार होने पर शरीर को भीगे कपड़े से पोछते रहें।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर