यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिमागी बुखार से पांच बच्चों की मौत, सात बीमार

अररिया, निसं :
अररिया प्रखंड में दिगामी बुखार से गुरुवार को पांच बच्चों की मौत हो गयी, जबकि सात की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मृतकों में तीन मुड़बल्ला एवं दो भाग मोहब्बत गांव के निवासी थे। सूचना मिलते ही डीएम अजय कुमार चौधरी, एसपी विजय कुमार वर्मा व सिविल सर्जन विमलकांत ठाकुर प्रभावित गांव पहुंचे। मेडिकल टीम ने बीमार बच्चों को सदर अस्पताल अररिया में भर्ती करा दिया है। मुड़बल्ला के मृत बच्चे एक ही परिवार के हैं। डीएम ने प्रभावित व आसपास के गांवों में दवा छिड़कवाने का निर्देश दिया है।
मेडिकल टीम में शामिल डा. मोईज व महामारी विशेषज्ञ अरुणेदु झा ने बच्चों की मौत का कारण दिमागी बुखार (इंसेफेलाइटिस) बताया।
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि 17 दिसम्बर को सबसे पहले साजिया को कै दस्त व पेट में दर्द होने लगा। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गयी। दिलकशी एवं राजिया सुल्ताना को गुरुवार सुबह से दस्त एवं दर्द शुरू हुआ। साजिया की स्थिति गंभीर होने उसे कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां कुछ ही देर में उसकी मौत हो गयी। रजिया सुल्ताना को भी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मृतका की मां ने बताया कि उसकी बच्ची को पेट दर्द के साथ-साथ दस्त होने लगा। इसके बाद उसका दम फूलने लगा और वह अपने शरीर को नोंचने लगी। इसके कुछ देर बाद उसकी मौत हो गयी।
मृत बच्चों की सूची
1- दिलकशी (4 वर्ष), पिता-मो. जमशेद, गांव-मुड़बल्ला
2- राजिया सुल्ताना (4 वर्ष), पिता मो. मुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
3- साजिया (3 वर्ष), पिता मो. खुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
4- नावाजिश (6 वर्ष), पिता-मो. मंजर आलम, गांव-भाग मोहब्बत
5- हैदर (8 वर्ष), पिता-मो. कैशर, गांव-भाग मोहब्बत
बीमार बच्चों की सूची
1- आशिया (4 वर्ष), पिता-मो. खुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
2- शालिक (6 वर्ष), पिता-मो. खुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
3- आलिया (डेढ़ वर्ष), पिता- खुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
4- दिलवरी (साढ़े तीन वर्ष), पिता मो. जमशेद, गांव मुड़बल्ला
5- अताउल्लाह (एक वर्ष), पिता- मो. मुर्शीद, गांव-मुड़बल्ला
6- बाबुल, पिता मो. मुर्शीद मुड़बल्ला
7- हसमेदा (डेढ़ वर्ष), पिता-मो. जुम्मन, गांव-मुड़बल्ला
कोट :
यह रोग वायरस की वजह से होता है। इसके संक्रमण का सबसे पहले दिमाग पर असर होता है। इसके बाद वायरस सांस को बंद करना शुरू कर देता है। जिससे मरीज की मौत हो जाती है।
विमलकांत ठाकुर, सिविल सर्जन
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