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अगले 5 साल में अंतरिक्ष बनेगा नया जंग का मैदान, इंटरनेट-बैंकिंग और एयरलाइंस को खतरा

Published: Tue, 20 Oct 2026 04:02 PM (IST)

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगला युद्ध अंतरिक्ष में हो सकता है, जिससे जीपीएस, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी आधुनिक सेवाएं प्रभावित होंगी।

दुनिया का अगला युद्ध अंतरिक्ष में छिड़ने की आशंका (AI जेनेरेटेड)

दुनिया का अगला युद्ध अंतरिक्ष में छिड़ने की आशंका (AI जेनेरेटेड)

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डिजिटल डेस्क, लंदन। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया का अगला युद्ध अंतरिक्ष में छिड़ सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष गतिविधियों ने चिंता बढ़ा दी है।

उपग्रहों पर हमला होने से जीपीएस, इंटरनेट, टीवी प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान, हवाई यातायात और बैंकिंग जैसी आधुनिक जीवन की बुनियादी व्यवस्थाएं ठप पड़ सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की कंपनियां अब दुश्मन उपग्रहों की निगरानी और उन्हें रोकने की तकनीक विकसित कर रही हैं. ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने एस्ट्रोस्केल और ऑर्बिट फैब जैसी कंपनियों को अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल किया है।

वहीं, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि रूस के 2022 में छोड़े गए कॉसमॉस-2553 उपग्रह में परमाणु उपकरण के कुछ हिस्से भी भेजे गए थे।

यहां पांच प्वाइंट में समझिए अंतरिक्ष कैसे बनेगा जंग का मैदान।

1. उपग्रह को मिसाइल से नष्ट करना

चीन ने 2007 में अपने ही एक मौसम संबंधी उपग्रह को मिसाइल से नष्ट किया था। अमेरिका, रूस और भारत भी उपग्रह नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। ऐसे हमले से अंतरिक्ष में मलबा फैलता है, जो दूसरे उपग्रहों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

2. उपग्रह के संकेतों को जाम करना

रेडियो संकेतों के जरिए जीपीएस जैसे उपग्रहों से मिलने वाले संकेतों को बाधित किया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जीपीएस संकेतों में रुकावट की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे विमानों और जहाजों के नेविगेशन पर असर पड़ सकता है।

3. नकली संकेत भेजना (स्पूफिंग)

हमलावर नकली उपग्रह संकेत भेजकर किसी उपकरण को गलत स्थिति या समय बता सकता है। इसे स्पूफिंग कहते हैं। इससे नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह भ्रमित हो जाता है।

4. कमांड सेंटर पर हमला

उपग्रहों को नियंत्रित करने वाले कंप्यूटर और कमांड सेंटर को निशाना बनाया जा सकता है। इससे संपर्क टूट सकता है, डेटा चुराया जा सकता है या उपग्रह का संचालन प्रभावित हो सकता है।

5. दूसरा उपग्रह पास भेजकर निगरानी या नुकसान पहुंचाना

चीन, रूस और अमेरिका के उपग्रह दूसरे अंतरिक्ष यानों के करीब जाकर उनकी गतिविधियों की निगरानी करने जैसी क्षमताएं दिखा चुके हैं। यही तकनीक संघर्ष के दौरान दूसरे उपग्रह में हस्तक्षेप करने या उसे नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

अंतरिक्ष में 5 उपग्रहों का युद्धाभ्यास कर रहा है चीन

अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, चीन के पांच उपग्रहों ने अंतरिक्ष में एक-दूसरे के करीब जाकर युद्ध जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया।

चीन रोबोटिक उपकरणों से अंतरिक्ष की वस्तुओं को पकड़ने और हटाने की तकनीक भी विकसित कर रहा है। वहीं, रूस के सैन्य उपग्रह दूसरे देशों के उपग्रहों के करीब पहुंच रहे हैं।

ब्रिटिश एयरफोर्स ने बनाई विशेष अंतरिक्ष इकाई

ब्रिटेन की वायुसेना ने सितंबर में अपने उपग्रहों की सुरक्षा के लिए पहली विशेष अंतरिक्ष इकाई घोषित की। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी भी परियोजनाओं में सैन्य और सुरक्षा संबंधी उपयोग शामिल कर रही है।

लेजर से लेकर उपग्रह पकड़ने वाले उपकरण तक

दुइय एके अलग-अलग देश सैटेलाइट को निष्क्रिय करने के लिए लेजर, विद्युत चुंबकीय तरंगों वाले हथियार और अंतरिक्ष यानों को पकड़ने वाले उपकरण बना रहे हैं। एंटी सैटेलाइट मिसाइलों का परीक्षण भी हो चुका है।

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