लंदन, रायटर/प्रेट्र। यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलगाव को लेकर प्रस्तावित समझौते पर प्रधानमंत्री टेरीजा मे को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ सकता है। समझौते के मसौदे को लेकर उनकी पार्टी से ही उन्हें चुनौतियां मिल रही हैं। लेकिन टेरीजा मे ने साफ कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री पद नहीं छोड़ने जा रही। उन्होंने समझौते को आखिरी पड़ाव तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया है।

ईयू से अलग होने के लिए कराए गए जनमत संग्रह के दो साल बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ब्रिटेन कैसे और किन शर्तो पर अलग होगा और 29 मार्च 2019 के तय समय पर अलग हो भी पाएगा या नहीं। टेरीजा मे समझौते के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की मुहर लगवाने में तो सफल रही हैं, लकिन उन्हें अपनी ही कंजरवेटिव पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी सांसद स्टीव बाकर के मुताबिक यह विरोध अविश्वास प्रस्ताव तक जा सकता है।

उनकी पार्टी के सांसद तथाकथित 1922 कमेटी को मे के नेतृत्व में अविश्वास जताते हुए पत्र लिख रहे हैं। पत्र लिखने वाले सांसदों की संख्या 48 तक पहुंच जाती है तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। डेली टेलीग्राफ के मुताबिक तो मे के खिलाफ अगले हफ्ते मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव आ सकता है।

भारतीय मूल के शैलेष वारा समेत चार मंत्रियों के इस्तीफों के बाद टेरीजा मे को शुक्रवार को अपने दो शीर्ष मंत्रियों का समर्थन मिला। इससे उत्साहित टेरीजा समझौते को अंतिम पड़ाव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता जता रही हैं। उन्होंने इसे ब्रिटेन के हित में बताया है। ब्रेक्जिट समर्थक पर्यावरण मंत्री माइकल गोव और व्यापार मंत्री लायम फॉक्स ने मे का समर्थन किया है।

गोव ने कहा कि वह सरकार में बने रहेंगे। मे के डिप्टी डेविड लिडिंगटन को उम्मीद है कि वह अविश्वास प्रस्ताव को आसानी से जीत जाएंगी, जिसके लिए उन्हें सामान्य बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि, समझौते पर संसद की मुहर लगवाना आसान नहीं होगा। 650 सदस्यी संसद में उन्हें कम से कम 320 सांसदों की जरूरत होगी। इस घमासान के बीच डेली मेल ने इस मसले पर एक हजार से ज्यादा लोगों के बीच सर्वे कराया। 49 फीसद लोगों ने समझौते का विरोध किया, वहीं 27 फीसद लोग उसके समर्थन में थे।

ब्रेक्जिट समर्थकों को फ्रांस के मंत्री की चेतावनी
ब्रेक्जिट का समर्थन करने वाले लोगों को फ्रांस के वित्तमंत्री ब्रूनो ली मायरे ने खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ब्रेक्जिट की वकालत कर रहे लोगों को लंदन और ब्रसेल्स के बीच हुए समझौते या आर्थिक संकट के खतरे में से किसी एक का चुनाव करना होगा। उन्होंने कहा कि साझा यूरोपीय बाजार से अलग होने के बाद ब्रिटेन के लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

ब्रेक्जिट रोकने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को राजी
ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट सरकार की उस अपील पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है जिसमें उससे यूरोपीय यूनियन की शीर्ष अदालत को ब्रेक्जिट को पलटने के मामले पर सुनवाई करने से रोकने की मांग की गई है। स्कॉटलैंड के नेताओं ने यूरोपीयन कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) में अपील दायर की है और जानना चाहा है कि क्या लंदन ईयू के अन्य सदस्यों देशों की अनुमति के बिना अलग होने की अपनी अधिसूचना को वापस ले सकता है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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