लंदन, प्रेट्र। शोधकर्ताओं ने फसल को कीटों से बचाने के लिए एक नया स्मार्टफोन एप विकसित किया है। नए एप के माध्यम से किसान अपनी फसलों को टिड्डियों के प्रकोप से बचा सकेंगे। हाल ही में पाकिस्तान और भारत के राजस्थान और पंजाब में टिड्डियों का प्रकोप छाया हुआ है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस दिशा में तुरंत एक्शन लेने को कहा है।

साइंटिफिक रिपोर्ट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इस एप के बारे में जानकारी दी गई है। इस एप का नाम 'माइस्ट्रो' है। यह एप स्मार्टफोन के कैमरे के माध्यम से टिड्डियों और कीटों को पहचान सकता है और उनकी जीपीएस लोकेशन को भी रिकॉर्ड कर सकता है।

ब्रिटेन की लिंकन यूनिवर्सिटी समेत शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि किसान इस एप के माध्यम से कीटों और टिड्डियों के स्थान और मात्रा का पता लगा सकते हैं। इसके बाद यह पता चल जाएगा कि कितनी मात्रा के कीटनाशक की जरूरत है, जिससे फसल पर भी कुप्रभाव न पड़े।

क्लाउड सर्वर विकसित करने की योजना

शोधकर्ताओं ने बताया कि वे एक क्लाउड सर्वर विकसित करने की भी योजना बना रहे हैं, जिसमें एप के माध्यम से डाटा अपलोड किया सके ताकि टिड्डी दल की स्थिति का रियल टाइम पता लगाया जा सके।

तुरंत के हमलों से नहीं बचा जा सकता

इस अध्ययन के सह लेखक बशिल अल-डेरी ने कहा कि हर साल लगभग 1.8 करोड़ हेक्टेयर भूमि टिड्डियों और कीटों की वजह से क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिससे किसानों और उनकी उत्पादकता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इसकी निगरानी तकनीक केवल सवेक्षण पर आधारित है। इस तकनीक से तुरंत के हमलों से नहीं बचा जा सकता।

कीटों की आबादी के फैलाव के बारे में मिलेगी जानकारी

शोधकर्ताओं ने बताया कि हमारा मकसद नए एप के माध्यम से टिड्डियों के प्रसार को पहचानने और रिकॉर्ड करने में मदद मिलती है। जिससे किसान समय रहते ही उचित कदम उठाकर कीटों के हमलों से फसल को बचा सकते हैं। इस एप के माध्यम से कीटों की आबादी के फैलाव के बारे में उन्हें पहले ही पता चल जाएगा।

वर्तमान में पाकिस्तान में टिड्डी का प्रकोप

वर्तमान में पाकिस्तान और भारत के गुजरात, राजस्थान और पंजाब में टिड्डियों का प्रकोप छाया हुआ है। भारत में पिछले 26 वर्षो में यह टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला है।

इस तरह तैयार किया एप

अध्ययन में कहा गया कि शोधकर्ताओं ने एप को विकसित करने के लिए टिड्डियों के 3500 से अधिक चित्रों को इकट्ठा किया गया। इस एप के माध्यम से विभिन्न प्रकार के इलाकों में पौधों की वृद्धि को भी पहचान सकते हैं।

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