मेहुल चोकसी को झटका या मजबूरी? लंदन कोर्ट में भारत सरकार के खिलाफ हनीट्रैप का मुकदमा लिया वापस
भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने लंदन हाई कोर्ट में भारत सरकार और बारबरा जाराबिक के खिलाफ दायर अपहरण का मुकदमा वापस ले लिया है।
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भगोड़े मेहुल चोकसी ने भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा लिया वापस (फाइल फोटो)
HighLights
मेहुल चोकसी ने लंदन हाई कोर्ट से अपहरण का मुकदमा वापस लिया।
भारत सरकार और बारबरा जाराबिक के खिलाफ दायर किया था केस।
सुरक्षा लागत जमा करने में विफल रहने के कारण लिया फैसला।
डिजिटल डेस्क, लंदन। भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने लंदन हाई कोर्ट में भारत सरकार और यूके में रहने वाली हंगेरियन महिला बारबरा जाराबिक के खिलाफ मुकदमा वापस ले लिया है।
मेहुल चोकसी ने आरोप लगाया था कि 23 मई, 2021 को एंटीगुआ में हनीट्रैप की साजिश के तहत उनका अपहरण किया गया था और हर्जाने के तौर पर करोड़ों पाउंड का दावा किया था।
मेहुल चोकसी ने हनीट्रैप के केस लिया वापस
मेहुल चोकसी ने भारत सरकार पर हनीट्रैप की साजिश के तहत उसका अपहरण करने का आरोप लगाया था। इस मामले में एडवर्ड फिट्जगेराल्ड KC उसका प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
मेहुल चोकसी ने लंदन हाई कोर्ट में आरोप लगाया था कि भारतीय सरकार ने पांच लोगों के साथ मिलकर उन्हें एंटीगुआ से डोमिनिका होते हुए भारत लाने के लिए गैर-कानूनी तरीके से अपहरण किया, प्रताड़ित किया और बिना कानूनी प्रक्रिया के भारत भेजा।
चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक के 1.3 अरब पाउंड के घोटाले में शामिल होने का आरोप है। चोकसी एंटवर्प की जेल में हैं, जहां वह भारत प्रत्यर्पण के बेल्जियम की अदालत के आदेश के खिलाफ अपील कर रहा है।
इस मामले में जस्टिस मैन्सफील्ड ने कहा था, 'इस अर्जी के लिए जिन सबूतों पर भरोसा किया गया है, उनमें से ज्यादातर सुनी-सुनाई बातें हैं। दावा करने वाले के अपहरण और मारपीट के बारे में खुद दावा करने वाले के अलावा कोई गवाह नहीं है।'
चोकसी का क्या था आरोप?
चोकसी ने दावा किया था कि ये पांचों यूके में रह रहे थे, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश रची गई थी। उसका दावा है कि वे सभी किडनैपिंग करने के लिए एक साथ एंटीगुआ गए थे, जहां आरोप है कि जराबिक ने चोकसी को एक अपार्टमेंट में बुलाया।
चोकसी ने दावा किया कि फिर उसे जबरदस्ती डोमिनिका ले जाने वाली नाव पर बिठा दिया। चोकसी का कहना है कि वहां उसे धमकाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। चोकसी का आरोप है कि यह किडनैपिंग भारतीय सरकार ने करवाई थी।
सिक्योरिटी जमा नहीं कर पाए मेहुल चोकसी
जस्टिस मैन्सफील्ड ने इस मामले में पहले आदेश देते हुए था कि अगर चोकसी केस हार जाते हैं, तो उन्हें गुरदीप बाथ और लेस्ली फैरो-गाय के कानूनी खर्च के लिए 425,000 पाउंड और गुरमीत सिंह (भारतीय नागरिक) और गुरजीत सिंह भंडाल (ब्रिटिश भारतीय) के कानूनी खर्च के लिए 252,000 पाउंड की सिक्योरिटी कॉस्ट जमा करनी होगी।
गुरदीप बाथ सेंट किट्स एंड नेविस के भारत में हाई कमिश्नर हैं और लेस्ली फैरो-गाय, ब्रिटिश नागरिक और बाथ के पूर्व ड्राइवर हैं।
चोकसी तय समय सीमा तक अदालत में सिक्योरिटी जमा करने में नाकाम रहे, इसलिए चार पुरुष प्रतिवादियों के खिलाफ दावा खारिज कर दिया गया।
9BR चैंबर्स, जिसके बैरिस्टर गैरी समर्स ने बाथ और फैरो-गाय का प्रतिनिधित्व किया था, उन्होंने कहा, 'इसके बाद, उन्होंने भारत सरकार और जाराबिक के खिलाफ केस वापस ले लिया है।'
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