लंदन [प्रेट्र]। इटली में पीसा बंदरगाह पोर्ट्स पीसानस के अचानक लापता होने के बारे में वैज्ञानिकों ने कुछ रहस्योद्घाटन किए हैं। मध्य युग में इटली का सबसे मनोरम समुद्र तट माने जाने वाले पोर्ट्स पीसानस के पर्यावरण और इतिहास के बारे में अब तक कम ही जानकारी है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक समुद्र की क्रियाओं में बदलाव, समुद्री जलस्तर का ऊपर उठना और बदलते पर्यावरण ने बंदरगाह की उन्नति में काफी सहयोग किया।

इस तरह किया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने साढे़ दस हजार साल पहले के पूर्वी लिगुरियन समुद्र का लेवल सापेक्ष रूप में दोबारा बढ़ाकर इसका अध्ययन किया। इसके अलावा टीम ने कई ऐतिहासिक मानचित्र और भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर पीसा बंदरगाह के तट की आकृति विज्ञान के जरिए दोबारा छवि बनाने का प्रयास किया।

यह आया सामने

जनरल साइंटिफ रिपोर्ट्स में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि 200 ईसा पूर्व के आसपास एक प्राकृतिक रूप से संपन्न खाड़ी और पीसा शहर के दक्षिण में स्थित समुद्र के बीच एक अच्छा संपर्क था। शोधकर्ताओं का कहना है कि खाड़ी का प्रयोग नेविगेशन, व्यापार और बंदरगाह बनाने में किया गया। इसने पोट्र्स पीसानस को पांचवीं शताब्दी तक स्थापित रखा, लेकिन 1000-1250 ईसवीं के आसपास समुद्री जल के स्तर से इसकी डिग्री कम होने लगी। ऐसा समुद्री धाराओं के शिफ्ट होने के कारण हुआ।

इस तरह समाप्त हुआ अस्तित्व

1500 ईसवीं तक यह खाड़ी समुद्र से पूरी तरह कट गई और जब पोर्ट्स पीसानस की जगह लिवोर्ना बंदरगाह ने ली तो इसका अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सटर के मैटियो वाची का कहना है कि हमारे शोध से समुद्री तटों में होने वाले दीर्घकालीन परिवर्तन का महत्व पता चलता है और तटों के आसपास रहने वाले समाज इससे किस तरह प्रभावित होते हैं इसकी भी जानकारी मिलती है।

हमारे अध्ययन से पता चला कि किस तरह समुद्री जलस्तर और समुद्री क्रियाओं ने एक बंदरगाह को उन्नत बनाने में अपना योगदान दिया और समय के साथ वह बंदरगाह किन कारणों से दुनिया के नक्शे से गायब हो गया। मैटियो वाची कहते हैं, इस बंदरगाह के बारे में आधळ्निक इतिहास में भी बहुत कम जानकारी मिलता है। दुनिया को इस ऐतिहासिक बंदरगार से रूबरू कराया जा सके इसी उद्देश्य से हमने यह अध्ययन शुरू किया था। हम इसके बारे में काफी जानकारियां जुटाने में कामयाब रहे हैं। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal