लंदन, प्रेट्र। प्रेस की आजादी के लिए किया जाने वाला हर प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करता है। यह बात पूरी दुनिया पर लागू होती है। यह बात प्रेस की आजादी पर आयोजित पहले वैश्विक सम्मेलन में भारतीय मीडिया के प्रतिनिधियों ने कही। सम्मेलन में भारत की ओर से प्रसार भारतीय के अध्यक्ष डॉ. ए सूर्य प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता और पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कंचन गुप्ता भाग ले रही हैं। ब्रिटेन और कनाडा की सरकारें इस सम्मेलन की सह आयोजक हैं।

सम्मेलन में डॉ. सूर्य प्रकाश ने कहा, मीडिया की स्वतंत्रता के लिए होने वाले हर प्रयास का स्वागत होना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं। भारत न केवल सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि वह सर्वाधिक जीवंत लोकतंत्र भी है।

लोकतांत्रिक वातावरण सभी तरह के विचारों और सोच को प्राकृतिक रूप में सामने आने का मौका देता है। 2019 के व‌र्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत को 140 वां स्थान दिए जाने पर सवाल उठाते हुए प्रसार भारती के अध्यक्ष ने कहा, पता नहीं किसने और कहां से यह विश्लेषण किया? उन्होंने कहा, 180 देशों की इस सूची में भारत के ऊपर कुछ ऐसे देश रखे गए हैं जहां लोकतंत्र नहीं है या सीमित लोकतंत्र है। पता नहीं किस एजेंडे को ध्यान में रखकर यह सूची बनाई गई ?

डॉ. सूर्य प्रकाश ने कहा, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में प्रेस की आजादी उसकी जड़ों में समाहित है, इसी से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने भारत में पिछले 20 साल में मीडिया के उत्थान के उदाहरण रखे और बताया कि यह देश की लोकतांत्रिक जीवंतता का उदाहरण है। बताया कि 1990 में देश में विभिन्न भाषाओं में प्रतिदिन दो करोड़ 26 लाख अखबार छपते थे, 2018 में यह संख्या बढ़कर 24 करोड़ 20 लाख हो गई है। इसी तरह से टेलीविजन और रेडियो से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। यह प्रेस की मजबूती और स्वस्थ लोकतंत्र का प्रतीक है।

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Posted By: Nitin Arora