लंदन, आइएएनएस। बोवीन टीबी मवेशियों में होने वाला एक खतरनाक संक्रमण है। जिन गाय-भैसों को इसका संक्रमण होता है। उनके संपर्क में रहने या उनका कच्चा दूध पीने से मनुष्य को भी टीबी हो सकती है। सामान्यत: बोवीन टीबी से संक्रमित पशुओं को मार दिया जाता है। लेकिन अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टीका और स्किन टेस्ट विकसित किया है, जिससे जानवरों की हत्या के बजाए उनका समय रहते उपचार कर उन्हें जीवनदान दिया जा सकता है।

साइंटिफिक रिपोर्टस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ सूरे के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी वैक्सीन (टीका) विकसित की है, जो ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट (पीपीडी) करने में सक्षम है और पूरे ब्रिटेन में इसके मदद से मवेशियों में टीबी की निगरानी भी की जा सकती है। इस अध्ययन के शोधकर्ता जॉनजे मैकफैडेन ने कहा, ‘नया टीका बोवीन टीबी से सुरक्षा प्रदान करता है और पशुओं को इस घातक बीमारी से लड़ने में मदद करेगा। दुनिया भर में पांच लाख से अधिक मवेशी इसके संक्रमण से प्रभावित रहते हैं और किसानों के लिए यह बीमारी गंभीर आर्थिक संकट से कम नहीं है।

बोवीन टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो पशुओं के फेफड़ों को प्रभावित करती है। इंग्लैंड में बोवीन टीबी के मामले सबसे ज्यादा देखने का मिलते हैं। यहां 1950 में बोवीन टीबी का अनुपात एक प्रतिशत से भी कम हो गया था। यानी गाय-भैसों में टीबी लगभग खत्म हो गई थी। लेकिन बीती सदी के आठवें दशक में इसके मामले फिर से बढ़ने शुरू हुए। आज भी यहां जिन गाय-भैसों को बोवीन टीबी होती है, उन्हें मार दिया जाता है और किसानों को सरकार मुआवजा देती है।

बेकील कैलमेट गुएरिन (बीसीजी) नामक टीके के जरिये वर्तमान में टीबी ग्रस्त मनुष्यों को ठीक किया जाता है और यह मवेशियों पर भी प्रभावी है लेकिन इसकी मदद से पीपीडी परीक्षण नहीं किया जा सकता है। इस समस्या से पार पाने के लिए शोधकर्ताओं ने एक नया बीसीजी वैक्सीन स्ट्रेन बनाया, जिसमें कुछ ऐसे प्रोटीनों की कमी हो जो रोगाणुओं माइकोबैक्टीरियम बोविस के साथ साझा किए गए जीनों की पहचान करते हैं। इसमें एनकोडेड इम्यूनोजेनिक प्रोटीन होते हैं, जिन्हें बीसीजी की मदद से इसकी कार्यक्षमता प्रभावित किए बगैर हटाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा,‘नई दवा की मदद से टीबी ग्रस्त मवेशियों का समय रहते इलाज संभव है।’

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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