रूस में 'किलर प्लेग' से हड़कंप: एक महिला टेक्नीशियन की मौत, क्या भारत पर भी मंडरा रहा खतरा?
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक 28 वर्षीय महिला टेक्नीशियन की कथित तौर पर न्यूमोनिक प्लेग से मौत हो गई, जिससे संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

साइबेरिया में 28 वर्षीय महिला टेक्नीशियन की संदिग्ध प्लेग से मौत

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डिजिटल डेस्क, मॉस्को। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट में कार्यरत एक 28 वर्षीय महिला टेक्नीशियन की पिछले हफ्ते कथित तौर पर न्यूमोनिक प्लेग से मौत हो गई। इसकी खबरें सामने आने के बाद इस संक्रामक बीमारी के फैलने की आशंका पैदा हो गई है।
रूस ने इस संबंध एहतियाती कदम उठाए गए हैं और उस अस्पताल को क्वारंटाइन कर दिया गया है जहां महिला टेक्नीशियन का इलाज किया गया था। महिला के संपर्क में आए लोगों की भी निगरानी की जा रही है।
हालांकि रूसी अधिकारियों का कहना है कि उक्त कर्मचारी को अज्ञात वजह से निमोनिया हो गया था और ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि उसकी बीमारी उन पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों) की वजह से हुई थी जिनके साथ वह काम करती थी।
साइबेरिया में महिला टेक्नीशियन की प्लेग से मौत
इरकुत्स्क के सरकारी टीवी स्टेशन ने सोमवार को बताया कि पिछले सप्ताह इरकुत्स्क के पास स्थित शहर शेलेखोव के एक अस्पताल में महिला टेक्नीशियन की मौत हो गई।
मेयर मैक्सिम मोदिन ने शुक्रवार को बताया कि अस्पताल को क्वारंटाइन कर दिया गया है; अब वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा और न ही उन्हें छुट्टी दी जा रही है, इसकी प्रयोगशाला में नियमित टेस्ट भी रोक दिए गए हैं।
अस्पताल का बाह्मरोगी विभाग सामान्य रूप से काम कर रहा है। रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर की प्रमुख अन्ना पोपोवा शुक्रवार को इरकुत्स्क गईं और गवर्नर इगोर कोब्जेव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।
कोब्जेव ने संक्रमण की पहचान नहीं बताई, लेकिन इसे खतरनाक संक्रमण का संदिग्ध मामला बताया। उन्होंने कहा कि महामारी-रोधी सभी उपाय लागू किए जा रहे हैं।
रूस ने अस्पताल को क्वारंटाइन किया
एजेंसी ने बताया कि महिला के संपर्क में आए दो लोगों में सामान्य सर्दी-जुकाम फैलाने वाला वायरस पाया गया और दो अन्य लोगों में कोविड-19 की पुष्टि हुई, जबकि बाकी लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।
स्थानीय स्वतंत्र समाचार प्रतिष्ठान ल्यूडी बैकाला ने सूत्रों के हवाले से बताया कि महिला की मौत न्यूमोनिक प्लेग से हुई और कई अस्पतालों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। उस अस्पताल में लभगग 200 लोगों की निगरानी की जा रही है जहां महिला कर्मचारी का इलाज किया गया था।
हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अफवाहों या अटकलों के बजाय रोस्पोट्रेबनादजोर के बयानों को ही सही मानें।
उधर, शेलेखोव स्थित इरकुत्स्क अल्युमीनियम संयंत्र ने कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। प्लांट के निदेशक ने टेलीग्राम पर कहा, बाद में पछताने से बेहतर है पहले ही सावधानी बरती जाए।
रूबियो बोले, रख रहे बारीकी से नजर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि यह घबराने की बात है, लेकिन इस पर ध्यान देने और नजर रखने की जरूरत है।
जाहिर है कि अमेरिका और रूस के बीच बहुत कम यात्रा होती है, लेकिन किसी भी दूसरी चीज की तरह अगर कोई चीज बाहर निकलती है, तो वह तेजी से फैलती है।
भारत में खतरा नहीं
केरलम राज्य इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के रिसर्च सेल के संयोजक राजीव जयदेवन ने कहा कि भारत के लिए तत्काल खतरे की कोई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि प्लेग येर्सिनिया पेस्टिस नामक बैक्टीरिया से होता है। प्लेग के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं।
इसमें या तो आपको त्वचा की समस्या हो सकती है- जैसे त्वचा पर घाव होना। आपको निमोनिया या फेफड़ों का संक्रमण हो सकता है। बैक्टीरिया खून में भी फैल सकता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच सकता है। निमोनिया सबसे खतरनाक है और इससे सिर्फ 24 घंटे में मौत हो सकती है।
(न्यूज एजेंसी AP के इनपुट के साथ)
