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AI से लैस और पिस्तौल जैसा लॉन्चर... मैदान में आया रूस का नया ड्रोन शिकारी हथियार

Published: Sun, 31 May 2026 08:03 PM (IST)

रूसी सेना अब युद्धक्षेत्र में 'योल्का' नामक एक नया पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम इस्तेमाल कर रही है। यह पिस्तौल जैसी डिवाइस ...और पढ़ें

रूस का नया ड्रोन शिकारी हथियार योल्का (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

रूस का नया ड्रोन शिकारी हथियार योल्का (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. रूसी सेना ने 'योल्का' एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया।

  2. पिस्तौल जैसी डिवाइस से इंटरसेप्टर ड्रोन लॉन्च होता है।

  3. AI से लक्ष्य पहचानकर दुश्मन ड्रोन को हवा में नष्ट करता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रूसी सेना अब युद्धक्षेत्र में 'योल्का' नामक एक नए पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक सैनिक पिस्तौल जैसी दिखने वाली डिवाइस से एक छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को लॉन्च करता दिखाई देता है।

रिपोर्टों के अनुसार, लॉन्च होने के बाद यह ड्रोन अपने लक्ष्य की स्वतः पहचान करता है, उसका पीछा करता है और हवा में ही उसे नष्ट कर देता है। यह सिस्टम हाल के समय में ड्रोन खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।

'योल्का' पहली बार मई 2025 में रूस के विजय दिवस परेड के दौरान चर्चा में आया था। उस समय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास तैनात एक सुरक्षा अधिकारी के पास यह कॉम्पैक्ट डिवाइस देखी गई थी। बाद में अधिकारियों ने इसकी पहचान 'योल्का' सिस्टम के रूप में की।

कैसे काम करता है योल्का?

'योल्का' एक बंदूक जैसी डिवाइस से छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को लॉन्च करता है। लॉन्च के बाद यह ड्रोन आसमान में दुश्मन के ड्रोन की तलाश करता है और उसे ट्रैक करने लगता है। लक्ष्य मिलने पर यह उसका पीछा करता है और तेज गति से उससे टकराकर उसे निष्क्रिय या नष्ट कर देता है। खास बात यह है कि इस सिस्टम में किसी प्रकार के विस्फोटक का उपयोग नहीं किया जाता।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह ड्रोन कैमरों, सेंसरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से लक्ष्य की पहचान और ट्रैकिंग करता है। लॉन्च होने के बाद यह काफी हद तक स्वतः संचालित तरीके से काम कर सकता है।

आधुनिक युद्ध के लिए तैयार नया हथियार

'योल्का' का डिजाइन काफी अलग है। इसका शरीर बेलनाकार है और इसमें एक्स आकार के दो सेट वाले पंख लगे हैं, जो उड़ान के दौरान स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसमें पारंपरिक विमान की तरह पूंछ नहीं होती। पीछे की ओर छोटे इलेक्ट्रिक मोटर और प्रोपेलर लगे हैं, जो इसकी दिशा और गति को नियंत्रित करते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यह सिस्टम लगभग 3 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को निशाना बना सकता है और इसकी गति 200 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। यह आकार में छोटा और हल्का है तथा प्रत्येक इंटरसेप्टर की अनुमानित कीमत करीब 500 डॉलर बताई गई है।

यूक्रेन युद्ध से मिली सीख

'योल्का' को खास तौर पर निगरानी ड्रोन और एफपीवी कामिकाजे ड्रोन से मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है। ऐसे ड्रोन आधुनिक युद्धों में तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है।

रूस का यह नया सिस्टम कम लागत में ड्रोन खतरों से निपटने का एक नया विकल्प माना जा रहा है और इसे भविष्य के युद्धों की जरूरतों के अनुसार विकसित किया गया है।

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