'विफलता की कगार पर': सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने पाकिस्तान को दी चेतावनी
सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने चेतावनी दी है कि अपनी हालिया राजनयिक सफलताओं के बावजूद पाकिस्तान विफलता की कगार पर खड़ा है।
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समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक ने पाकिस्तान के भविष्य को लेकर बेहद सख्त आकलन पेश किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अपनी हालिया राजनयिक सफलताओं के बावजूद पाकिस्तान अभी भी विफलता की कगार पर खड़ा है।
नेशनल प्रेस फाउंडेशन की इंटरनेशनल रिपोर्टिंग फेलोशिप के दौरान अस्थिर भू-राजनीतिक समय में दृष्टिकोण बनाए रखना विषय पर बोलते हुए सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के पूर्व स्थायी सचिव बिलहारी कौसिकन ने यह तीखी टिप्पणी की। उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान की विदेश नीति की सफलताएं उसकी गहरी घरेलू समस्याओं को छिपा नहीं सकतीं।
अमेरिका-ईरान विवाद पर जवाब
कौसिकन की यह टिप्पणी एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल के जवाब में आई। पत्रकार ने पूछा था कि हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष अगले पांच वर्षों में पाकिस्तान के भविष्य को कैसे आकार दे सकता है।
सवाल पूछते हुए पत्रकार ने पाकिस्तान पर बढ़ते घरेलू दबावों का भी जिक्र किया था, जिसमें आसमान छूती महंगाई, ईंधन की उच्च कीमतें, पाकिस्तानी यात्रियों को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध और बढ़ती सुरक्षा चिंताएं शामिल हैं।
कूटनीति से लोगों का पेट नहीं भरता
जवाब में कौसिकन ने कहा कि मैं बहुत स्पष्ट बात कहूंगा। पाकिस्तान ने कूटनीतिक अवसर का लाभ उठाने में बहुत फुर्ती और सफलता दिखाई है, और इससे अमेरिका की नजरों में पाकिस्तान की छवि कुछ हद तक सुधरी भी है। लेकिन, आप जानते हैं, इससे पाकिस्तानी लोगों का पेट नहीं भरता।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो विफलता की कगार पर खड़ा है, और काफी समय से इसी स्थिति में है। यह अभी पूरी तरह से ढहा नहीं है, जिसके लिए हम सभी को आभारी होना चाहिए, लेकिन राजनयिक सफलता इस जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकती।
मुझे नहीं लगता कि अमेरिका पाकिस्तान पर लगे प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाएगा, क्योंकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान हर तरह के चरमपंथी समूहों का गढ़ है, जो जरूरी नहीं कि अमेरिकी हितों के लिए काम कर रहे हों।
सेना के नेतृत्व वाली रणनीति पर सवाल
वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि सुधरने के बावजूद पाकिस्तान की बुनियादी चुनौतियां जस की तस हैं। कौसिकन ने पाकिस्तान की सेना के नेतृत्व वाले रणनीतिक दृष्टिकोण की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि विदेश नीति की सफलताएं आंतरिक कमजोरियों की भरपाई नहीं कर सकतीं।
कौसिकन ने जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना बहुत फुर्तीली और सफल रही है, इसका श्रेय उन्हें दिया जाना चाहिए। लेकिन कूटनीतिक सफलता से लोगों का पेट नहीं भरता यही कड़वी सच्चाई है। पाकिस्तान की समस्याएं कूटनीतिक नहीं हैं। बल्कि पाकिस्तान की समस्याएं कहीं अधिक बुनियादी हैं।
अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन विभिन्न जिहादी आंदोलनों को बेकाबू होने देना यदि आप इन समस्याओं को नहीं सुधारते हैं तो आप हमेशा देश के विफल होने की कगार पर ही झूलते रहेंगे।
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