पाकिस्तान: घोस्ट स्कूलों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर सिंध हाई कोर्ट सख्त, सेंसर बोर्ड को दिया 10 दिनों का समय
सिंध हाई कोर्ट ने सिंध फिल्म सेंसर बोर्ड को 'घोस्ट स्कूलों' पर बनी डॉक्यूमेंट्री को स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट देने के फैसले ...और पढ़ें

सिंध हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को पुनर्विचार का आदेश दिया।
HighLights
सिंध हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को पुनर्विचार का आदेश दिया।
'घोस्ट स्कूलों' पर बनी डॉक्यूमेंट्री के सर्टिफिकेशन का मामला।
फिल्म निर्माता सीमाब गुल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
डिजिटल डेस्क, कराची। पाकिस्तान की एक अदालत ने सिंध फिल्म सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह प्रांत में 'घोस्ट स्कूलों' (कागजों पर मौजूद स्कूल) की समस्या पर बनी एक पुरस्कार विजेता डाक्यूमेंट्री को स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट न देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।सिंध में 'घोस्ट स्कूलों' का मुद्दा काफी चर्चित है।
यहां हजारों स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ कागजों पर मौजूद हैं, लेकिन वहां के टीचिंग स्टाफ के लिए नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता है। सिंध हाई कोर्ट की दो जजों की संवैधानिक पीठ ने बुधवार को जारी आदेश में सिंध फिल्म सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर 'घोस्ट स्कूल' डाक्यूमेंट्री के सर्टिफिकेशन पर फिर से विचार करे।
अदालत ने बोर्ड के उस पुराने फैसले को भी रद कर दिया, जिसमें फिल्म से कुछ खास शब्दों और दृश्यों को हटाने के लिए कहा गया था। ब्रिटिश-पाकिस्तानी फिल्म निर्माता सीमाब गुल, जिन्होंने इस डाक्यूमेंट्री को फाइनेंस किया, प्रोड्यूस किया और निर्देशित भी किया है, ने अगस्त में बोर्ड द्वारा स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट देने से इन्कार किए जाने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था। गुल ने गुरुवार को कहा कि उनके पास अदालत की मदद लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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