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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पाकिस्तान में कमजोर समुदायों को धर्म के आधार पर बनाया जा रहा निशाना, यूएन ने लगाई फटकार

Published: Mon, 28 Jul 2025 11:44 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने धार्मिक ...और पढ़ें

धर्म के आधार पर कमजोर समुदायों को पाकिस्तान में बनाया जा रहा निशाना।
धर्म के आधार पर कमजोर समुदायों को पाकिस्तान में बनाया जा रहा निशाना।

आईएएनएस, इस्लामाबाद। पाकिस्तान में धार्मिक या आस्था के आधार पर कमजोर समुदायों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की रिपोर्टों से चकित संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक पैनल ने देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए तत्काल जांच, अभियोजन और सुधारों की मांग की है।

पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान को यह व्यक्त करते हुए कड़ी फटकार लगाई कि वे धार्मिक या आस्था के आधार पर कमजोर समुदायों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की रिपोर्टों से चकित हैं। पाकिस्तान को उस दंड मुक्ति के पैटर्न को तोड़ना चाहिए जिसने अपराधियों को बिना किसी रोक-टोक के कार्य करने की अनुमति दी है।

संयुक्त राष्ट्र के पैनल की ये मांग

संयुक्त राष्ट्र के पैनल ने देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए तत्काल जांच, अभियोजन और सुधारों की मांग की। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक जिनमें अहमदिया मुसलमान, ईसाई, हिंदू और शिया मुसलमान शामिल हैं लगातार उपेक्षित हैं और लक्षित राज्य-समर्थित उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और न्यूयार्क स्थित मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स वाच की नवीनतम रिपोर्टों ने भी ''संविधानिक दमन'' को उजागर किया है और 2025 में ईशनिंदा के आरोपों से उत्पन्न हिंसा को ''उन समुदायों के खिलाफ बढ़ता आतंक'' बताया है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक कर रहे उत्पीड़न का सामना

पाकिस्तान का अहमदिया समुदाय गंभीर उत्पीड़न का सामना कर रहा है, जिसे 1974 में संविधान द्वारा गैर-मुस्लिम घोषित किया गया था। उन्हें कानून द्वारा मुसलमान के रूप में पहचानने, सार्वजनिक रूप से अपने विश्वास का पालन करने या अपने पूजा स्थलों को मस्जिद बनाने से प्रतिबंधित किया है। ह्यूमन राइट्स वाच ने अहमदिया के खिलाफ कई हिंसा के मामलों का दस्तावेजीकरण किया, जिसमें उनकी मस्जिदों का अपमान, उनके कब्रिस्तानों को तहस-नहस करना और उनके धार्मिक ग्रंथों का जलाना शामिल है।''

दुष्कर्म, मतांतरण और जबरन निकाह निरंतर संकट बने हुए हैं, जिसमें हिंदू, ईसाई और सिख लड़कियों (कुछ की उम्र 12 वर्ष तक) का अपहरण किया जाता है, उन्हें दुष्कर्म के बाद इस्लाम में परिवर्तित किया जाता है और उनके अपहरणकर्ताओं से निकाह कराया जाता है।

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