काबुल, एएनआइ। पाकिस्तान जल्द ही अफगानिस्तान के एविएशन स्टाफ को ट्रेनिंग देगा। अफगान दूतावास ने कहा कि पाकिस्तान सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, अग्निशमन (firefighting), वायु पूर्वानुमान और हवाईअड्डा प्रबंधन के क्षेत्रों में अफगानिस्तान के एविएशन स्टाफ को पेशेवर ट्रेनिंग प्रदान करेगा।

खामा प्रेस ने एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मोटाकी की पाकिस्तान यात्रा के दौरान द्विपक्षीय समझौता हुआ था। दोनों देश काबुल और इस्लामाबाद के बीच हर हफ्ते दस उड़ानें संचालित करने पर भी सहमत हुए हैं। दो उड़ान बड़े विमानों द्वारा और बाकी उड़ानें छोटे विमानों द्वारा की जाएंगी। इस दौरान सीटों की संख्या 1,000 से बढ़ाकर 1,500 की जाएगी और विमान पाकिस्तान के किसी भी हवाई अड्डे से काबुल, मजार-ए-शरीफ और कंधार के लिए उड़ान भरने में सक्षम होंगे। इस बीच, अफगानिस्तान के विमानों को भी इस्लामाबाद, क्वेटा और पेशावर के हवाई अड्डों के लिए उड़ान भरने की अनुमति दी जाएगी।

उधर, असम में हुई हिंसा का इस्तेमाल करते हुए भारत के खिलाफ एक दुष्प्रचार अभियान शुरू किया गया था। एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इस दुष्प्रचार अभियान का लक्ष्य भारत था, जबकि सच्चाई यह है कि इस अभियान के निशाने पर सऊदी अरब और यूएई थे। इतालवी राजनीतिक सलाहकार और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने टाइम्स आफ इजरायल के एक आर्टिकल में ये बातें कही हैं। उनके मुताबिक, भारत की मदद करने पर विशेष रूप से क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद को लक्षय बनाते हुए दुष्प्रचार अभियान चलाए गए थे। इन अभियानों के पीछे पाकिस्तान है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब, यूएई और भारत के खिलाफ चलाए जा रहे इन दुष्प्रचारों में पाकिस्तान, कतर और तुर्की की भूमिका है।

कतर में स्थित एक कट्टरपंथी राजनीतिक-धार्मिक संगठन, मुस्लिम ब्रदरहुड के वर्चस्व वाले कतर, तुर्की और पाकिस्तान का एक गठजोड़ कट्टरपंथी इस्लामवादियों के लिए नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार के उद्घाटन समारोह के लिए कतर, तुर्की और पाकिस्तान को ही क्यों आमंत्रित किया, जबकि अपने पिछले दोस्तों और समर्थकों सऊदी अरब एवं यूएई को अनदेखा कर दिया।

Edited By: Pooja Singh