नई दिल्ली, आइएएनएस। अफगानिस्तान में पाकिस्तान समर्थक सरकार के प्रबंधन में अपने जबरदस्त हस्तक्षेप को लेकर इमरान खान के नेतृत्व वाले पड़ोसी देश को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। इस बीच पाकिस्तान ने अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए डैमेज कंट्रोल करने की कवायद शुरू कर दी है।

पाकिस्‍तान की भूमिका को लेकर हो रही आलोचना

इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76वें सत्र में एक प्रमुख राजनयिक आक्रमण शामिल है, जो व्यापक रूप से उसकी आतंक प्रेम वाली धारणा का मुकाबला करने के लिए है। पाकिस्तान को न केवल इसलिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, कि उसने अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के गठन में भूमिका निभाई, बल्कि इस सरकार में हक्कानी नेटवर्क के उन शीर्ष नेताओं की तैनाती भी सुनिश्चित भी, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी के तौर पर जाना जाता है।

पाकिस्‍तान भेज सकता है लगभग 40 राजनयिकों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल

अब डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आए प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान लगभग 40 राजनयिकों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल न्यूयार्क भेज सकता है। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इमरान खान करेंगे, जिसमें विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और विदेश सचिव सोहेल महमूद उनके साथ होंगे। एजेंडे में सबसे ऊपर 21-24 सितंबर के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठकें हैं।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान वैश्विक महाशक्तियों अमेरिका, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की कोशिश में है। इसके अलावा इस्लामिक देशों तुर्की, सऊदी अरब और कतर के साथ भी वह इसी तरह की बैठकें करना चाहता है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान, ब्रिटेन और मालदीव के साथ भी बैठक का इच्छुक है। मालदीव को जल्द ही एक महीने के लिए यूएनजीए की अध्यक्षता मिलने वाली है। यूएनजीए की इस महीने की अध्यक्षता आयरलैंड के पास है।

यूएनजीए के वर्तमान अध्यक्ष, वोल्कन बोजकिर के अनुसार,14 सितंबर से शुरू हो रहे यूएनजीए के 76वें सत्र में 83 राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। आमने-सामने की बैठक इस वर्ष महत्व रखती है क्योंकि पिछले सत्र को महामारी के कारण आनलाइन बैठक में बदलना पड़ा था।

अगले कुछ महीनों में यूरोप के कई देशों को यह मौका मिलने वाला है। हालांकि अमेरिका ने कोरोना के खतरे को देखते हुए यूएन से मीटिंग में अनावश्यक भीड़भाड़ से बचने का आग्रह किया है लेकिन इस बार 80 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों के भाग लेने से सत्र काफी गहमागहमी वाला होने की उम्मीद है।

Edited By: Arun Kumar Singh