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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिंधु जल संधि पर भारत ने दी टेंशन, पाकिस्तान ने आखिरकार कबूला सच; शहबाज सरकार ने किया बड़ा एलान

Published: Wed, 02 Jul 2025 12:14 PM (IST)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने जल भंडारण को मजबूत करने का ऐलान किया है। यह निर्णय भारत द्वारा सिंधु ...और पढ़ें

पहलगाम हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का कदम उठाया था।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का कदम उठाया था।

HighLights

  1. बूंद-बूंद को तरसने से डरा पाकिस्तान।
  2. शहबाज सरकार ने बनाई अब नई स्ट्रेटेजी।

पीटीआई, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार पानी के भंडारण के तरीके को मजबूत करेगी। ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने का कदम उठाया था।

पाकिस्तान की बडे़ पैमाने पर खेती-बाड़ी सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर निर्भर है। अगर इन नदियों के जलस्तर में कमी आई तो पाकिस्तान दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा और बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा।

पाक पीएम शहबाज शरीफ ने मंगलवार को नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के दौरे के दौरान इस मसले पर बात की। सरकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि दुश्मन जल समझौते के खिलाफ कदम उठाना चाहता है।

'हम पानी को स्टोर करने के लिए कोशिशें करेंगे'

शहबाज शरीफ ने कहा, "हमारी हुकूमत ने फैसला किया है कि हम अपनी पानी के भंडार बनाएंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तानी सरकार पानी को बरतने के तरीके पर काम करेगी और भंडारण इसमें अहम कड़ी होगी, जिसमें डायमर भाशा डैम जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

उन्होंने कहा, "हम अपनी ताकत से अगले कुछ सालों में पानी को स्टोर करने की क्षमता तैयार कर लेंगे। इसमें नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी का अहम किरदार होगा।"

पहलगाम हमले के बाद अब पाकिस्तान को सता रही पानी की चिंता

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। ये समझौता दोनों मुल्कों के बीच पानी के बंटवारे का अहम जरिया है। पाकिस्तान का मानना है कि पानी के बहाव में किसी भी तरह की रुकावट उसकी खेती के लिए बड़ा खतरा है।

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