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अपनी ही 'औलादों' से घिरा पाकिस्तान: चरम पर आतंकवाद, बना दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित देश; रिकॉर्ड स्तर पर मौत

Published: Sun, 22 Mar 2026 05:46 PM (IST)

पाकिस्तान 2025 में ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर रहा, जो दुनिया का सबसे अधिक आतंक प्रभावित देश बन गया ...और पढ़ें

HighLights

  1. पाकिस्तान 2025 में ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर।

  2. टीटीपी ने किए सर्वाधिक हमले, अफगानिस्तान से मिल रहा समर्थन।

  3. पुरानी आतंकी नीतियां अब पाकिस्तान के लिए बनीं चुनौती।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान ने वर्षों तक आतंकवादी संगठनों को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया, लेकिन अब वही नीति उसके लिए भारी पड़ रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान दुनिया का सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित देश बन गया है, जहां हमले, मौतें और हिंसा लगातार बढ़ रही है।

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के मुताबिक, पाकिस्तान पहली बार सूची में शीर्ष पर पहुंचा है। साल 2025 में यहां 1139 लोगों की मौत हुई, 1045 हमले हुए, 1595 लोग घायल हुए और 655 लोगों को बंधक बनाया गया।

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पाकिस्तान का स्कोर 8.574 रहा, जो सभी देशों से ज्यादा है। यह 2013 के बाद सबसे घातक साल रहा और लगातार छठा साल है जब आतंक से मौतों में बढ़ोतरी हुई है। दक्षिण एशिया में भी यही एक देश है जहां हालात बिगड़े हैं, बाकी देशों में सुधार हुआ है।

किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर?

  • रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा हमले खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हुए। कुल हमलों का 74% और मौतों का 67% इन्हीं दो प्रांतों में दर्ज किया गया।
  • सबसे सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) रहा। 2025 में इस संगठन ने 595 हमले किए और 637 लोगों की जान ली, जो कुल मौतों का 56% है।
  • हत्या जैसी टारगेटेड घटनाएं 450% तक बढ़ गईं और पुलिस पर हमले भी बढ़े हैं। टीटीपी अब ड्रोन का इस्तेमाल भी कर रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

सीमा पार से मिल रहा समर्थन

रिपोर्ट बताती है कि 6000 से 6500 टीटीपी लड़ाके अफगानिस्तान के अंदर से काम कर रहे हैं और वहीं से पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। करीब 85% हमले अफगान सीमा के 10 से 50 किलोमीटर के दायरे में होते हैं।

पाकिस्तान के कबायली इलाकों को लंबे समय तक ऐसे समूहों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। यहां से तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अल-कायदा और बाद में टीटीपी जैसे संगठन मजबूत हुए। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद टीटीपी को और सुरक्षित ठिकाना मिल गया। पाकिस्तान ने अफगान सरकार से कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

पुरानी नीति अब उलटी पड़ रही

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने पहले 'अच्छे' और 'बुरे' तालिबान में फर्क किया था, लेकिन अब यह रणनीति काम नहीं कर रही। जो समूह पहले बाहर इस्तेमाल होते थे, अब देश के अंदर ही हमले कर रहे हैं। मार्च 2025 में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने एक ट्रेन को हाईजैक कर 442 लोगों को बंधक बना लिया, जो दुनिया के सबसे बड़े आतंकी हमलों में शामिल है।

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अब यह संगठन सिर्फ अलगाववाद नहीं, बल्कि सीधे राज्य के खिलाफ हमले कर रहा है। इसके निशाने पर चीनी नागरिक और सीपेक प्रोजेक्ट भी हैं। रिपोर्ट इसे सरकार की लंबे समय से चली आ रही सख्त नीतियों का नतीजा मानती है, जिसमें राजनीतिक समाधान की कमी रही।

भारत-पाक रिश्तों पर भी असर

रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद का सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन यह जरूर कहा गया है कि सीमा क्षेत्रों में ढील और आतंक को पनपने देने की नीति ने हालात बिगाड़े हैं। इसमें पहलगाम आतंकी हमले और भारत की 'ऑपरेशन सिंदूर' प्रतिक्रिया के बाद भारत-पाक संबंधों में आई गिरावट का भी जिक्र है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि कई सालों की नीतियों का असर है। लगातार बढ़ती हिंसा यह दिखाती है कि पहले की सैन्य रणनीतियां अब असरदार नहीं रह गई हैं।

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