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मध्यस्थता का ढोंग कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में दावा- ईरानी लड़ाकू विमानों को एयरबेस में दी थी पनाह

Published: Tue, 12 May 2026 08:28 AM (IST)

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए जगह दी थी।

पाकिस्तान में हुए शांति समझौते की फाइल फोटो। (सोर्स - रॉयटर्स)

पाकिस्तान में हुए शांति समझौते की फाइल फोटो। (सोर्स - रॉयटर्स)

HighLights

  1. पाकिस्तान ने ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर छिपाया

  2. अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए दी गई थी यह मदद

  3. अमेरिकी सीनेटर ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, सोमवार को सीबीएस न्यूज ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर पार्क करने की इजाजत दी थी। यह मदद शायद उन्हें अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार दो अधिकारियों ने बताया कि, ईरान ने अफगानिस्तान में भी अपने सिविल विमान पार्क करने के लिए भेजे थे, हालांकि इसमें लड़ाकू विमान भी शामिल थे या नहीं। नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने आगे बताया कि अप्रैल की शुरुआत में जब ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का एलान किया था, उसके कुछ ही दिनों बाद तेहरान ने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस पर भेजे थे।

अमेरिकी सीनेटर ने इस्लामाबाद की भूमिका पर उठाया सवाल

वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक सीनियर अधिकारी ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। इसके साथ ही अफगानिस्तान के सिविल एविएशन के एक अधिकारी ने बताया कि जंग शुरू होने से ठीक पहले, महान एयर का एक ईरानी सिविल विमान काबुल में उतरा था। हालांकि, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से साफ इनकार कर दिया है।

इन सब विवादों के बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस्लामाबाद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए, मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान के अब तक के सभी कामों की पूरी तरह से समीक्षा करने की मांग की।

उन्होंने कहा, "अगर यह रिपोर्ट सच है, तो अमेरिका, ईरान और दूसरे पक्षों के बीच मध्यस्थ की जो भूमिका पाकिस्तान निभा रहा है, उसकी पूरी तरह से नए सिरे से समीक्षा करना जरूरी है।" उन्होंने आगे कहा, "इजरायल के प्रति पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के कुछ पुराने बयानों को देखते हुए, अगर यह बात सच निकलती है, तो मुझे जरा भी हैरानी नहीं होगी।"

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