नई दिल्ली, एजेंसियां। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद निरोधी अभियान छेड़ दिया है। आशंका है कि इस अभियान का निशाना दशकों से उत्पीड़न झेल रही प्रांत की बलोच आबादी बन सकती है। बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर जियाउल्ला लंगोव ने कहा है कि आतंकियों के खिलाफ प्रांत में बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें निर्दोषों की हत्या करने वालों को दंडित किया जाएगा। 

आजादी की मांग को कुचलेगी पाकिस्‍तान सरकार

बीते तीन जनवरी को इसी प्रांत में अल्पसंख्यक शिया हजारा समुदाय के 11 मजदूरों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। वारदात की जिम्मेदारी आतंकी संगठन आइएस ने ली थी। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई थी। बलोच आबादी को डर है कि पाकिस्तान सरकार इस अभियान के नाम पर उनकी आजादी की मांग को कुचलेगी। कुछ हफ्ते पहले ही बलोच आबादी के अधिकारों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने वाली करीमा बलोच की टोरंटो में संदिग्ध परिस्थितियों में लाश पाई गई थी। 

बलोचों के घरों में की गई थी भारी तोड़फोड़

उनकी हत्या का आरोप पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ पर लग रहा है। एक अन्य घटना में दिसंबर में गरीब बलोचों की आबादी पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का कहर टूटा था। सुरक्षाकर्मी इन बलोचों के घरों में घुस गए थे और तलाशी के नाम पर वहां भारी तोड़फोड़ की थी। बलूचिस्तान की आजादी के आंदोलन से जुड़े एहतशाम अफगान कहते हैं कि हम झुकेंगे नहीं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अत्याचारों को सोशल मीडिया के जरिये दुनिया के सामने रखते रहेंगे। 

बलूचिस्तान में दस साल में 3,184 मारे गए

बलूचिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के साथ ही सरकार ने वे आंकड़े सामने रख दिए हैं जिनसे साबित होता है कि वहां पर बड़े पैमाने पर हिंसा होती है। बीते दस साल में बलूचिस्तान में अतिवादियों के कुल 2,886 हमले हुए हैं। इनमें 3,184 लोग मारे गए हैं। मारे गए लोगों में खासी संख्या बलोच लोगों की भी है। मारे गए 3,184 लोगों में 2058 नागरिक हैं जबकि 1,126 सुरक्षाकर्मी। 

 

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