नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) अपने देश की गिरती अर्थव्‍यवस्‍था को थामने में जी-जान से जुट गए हैं। इस कवायद में वह तमाम विभागों और मंत्रालयों के बजट में कटौती कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्‍होंने देश के रक्षा बजट में कटौती करने की योजना बनाई है। इस बात का खुलासा करते हुए उन्‍होंने कहा है कि अर्थव्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने के उपायों पर सेना ने सहमति जताई है। सुरक्षा को लेकर तमाम चुनौतियों के बीच सेना अगले वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा बजट को कम करने पर रजामंद हो गई है।

बलूचिस्तान के विकास में खर्च होगी रकम
इमरान खान (Imran Khan) ने ट्वीट कर कहा कि रक्षा बजट में कटौती से जो रकम बचेगी वह देश के जनजातीय क्षेत्रों और बलूचिस्तान के विकास में खर्च की जाएगी। उन्‍होंने कहा, 'गंभीर आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रक्षा बजट में कटौती को लेकर सेना की स्‍वैच्छिक पहल की मैं सराहना करता हूं।' हालांकि इसके थोड़ी देर बाद ही इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस, सैन्य मीडिया विंग, ISPR के जनरल जनरल मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा कि यह कटौती रक्षा और सुरक्षा की कीमत पर नहीं होगी। रक्षा क्षेत्र में यह बचत तीनों सेनाओं द्वारा अंदरूनी तौर पर की जाएगी।

गिरती आर्थिक वृद्ध‍िदर को संभालने की कवायद
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धिदर 5.2 फीसद थी जो इस साल यह घटकर 3.4 फीसद पर आ गई है। अगले साल इसमें और गिरावट होने का अनुमान है। विशेषज्ञों की मानें तो अगले साल यह 2.7 फीसद रह सकती है। बता दें कि इससे पहले फरवरी में पाकिस्‍तानी सरकार ने मौजूदा वित्‍त वर्ष में देश के रक्षा बजट में कोई कटौती नहीं करने का फैसला किया था। पाकिस्‍तानी सेना इस बारे में भले ही कुछ भी कहे लेकिन साफ जाहिर होता है कि देश के जर्जर होते आर्थिक हालात ने उसकी जेब पर भी कैंची चलाने का काम किया है।

चरम पर महंगाई, 112 रुपये बिक रहा पेट्रोल
पाकिस्‍तानी जनता महंगाई की मार से कराह रही है। मार्च में महंगाई दर बढ़कर 9.41 फीसद हो गई, जो नवंबर 2013 के बाद से सबसे अधिक है। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, देश में पट्रोल 112.68 रुपये, डीजल 126.82 रुपये और किरोसिन तेल 96.77 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। महंगाई पर काबू पाने के लिए पाकिस्तानी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 50 फीसद का इजाफा करते हुए इसे 10.75 फीसद कर दिया है, जिसकी वजह से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। अर्थव्यवस्था को दिवालिया होने से बचाने के लिए इमरान खान सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बेल आउट की मांग कर रही है।  

खजाना खाली, विदेशी राष्‍ट्रों के रहमो-करम पर मुल्‍क 
साल 2018 के आंकड़े कहते हैं कि पिछले एक दशक में पाकिस्तान का कर्ज 28 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। विदेशी मुद्रा भंडार कम होकर 10 अरब डॉलर से नीचे पहुंच चुका है। पाकिस्तान को अपनी सभी देनदारियां चुकाने के लिए जून, 2018 तक तकरीबन 17 अरब डॉलर की जरूरत थी, जिसे वह जुटा नहीं पाया है। उसका बजटीय घाटा 1.481 लाख करोड़ के पार है। आइएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का खजाना खत्‍म होने के कगार पर है। हालांकि, फौरी राहत की बात यह है कि इमरान खान सउदी अरब, यूएई और चीन से 8 अरब डॉलर का कर्ज लेने में सफल रहे हैं। 

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