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पाकिस्तान में आसमान छू रही LPG की कीमतें, लकड़ी-कोयले पर खाना पकाने को मजबूर लोग

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:13 PM (IST)

पाकिस्तान में ईरान सीमा बंद होने से LPG संकट गहरा गया है, जिससे कीमतें 600 PKR प्रति किलोग्राम तक पहुंच ...और पढ़ें

पाकिस्तान में गहराया LPG संकट

पाकिस्तान में गहराया LPG संकट

HighLights

  1. पाकिस्तान में LPG कीमतें आसमान छू रही, लोग लकड़ी-कोयले पर मजबूर।

  2. ईरान सीमा बंद होने से LPG आपूर्ति बाधित, संकट गहराया।

  3. घटते प्राकृतिक गैस उत्पादन ने पाकिस्तान का ऊर्जा संकट बढ़ाया।

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। ईरान के साथ लगने वाले प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग बंद होने से सप्लाई बाधित होने से पाकिस्तान में LPG संकट गहरा गया है। देश के कुछ हिस्सों में LPG की कीमत 600 PKR प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है जो सरकारी दर से दोगुने से भी अधिक है।

बलूचिस्तान में घरेलू LPG सिलिंडर जो पहले 4500 पाकिस्तानी रुपये का मिलता था उसकी कीमत अब बढ़कर 7000 पाकिस्तानी रुपये हो गई है।

LPG के बढ़ते दामों के कारण आम लोगों को खाना पकाने के लिए किफायती ईंधन ढूंढने में भारी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोग तो अब लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने को मजबूर हो गए हैं।

देश की बड़ी समस्या आई सामने

LPG गैस की कमी ने एक कहीं बड़ी समस्या को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन लगातार घट रहा है, महंगी आयात की गई गैस पर निर्भरता बढ़ गई है और गैस क्षेत्र पर कर्ज का बोझ खराबों रुपयों तक पहुंच गया है।

एक तरफ जहां आम लोग गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के पास आयातित LNG का ऐसा अतिरिक्त भंडार भी मौजूद है, जिसे न तो आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है।

सर्दियों से पहले गहराया LPG का संकट

अक्टूबर 2026 के अंत तक पाकिस्तान के कई हिस्सों में घरेलू ईंधन की किल्लत विकराल रूप ले चुकी है। ऑयल एंड गैस  रेगुलेटरी अथॉरिटी ने अक्टूबर के लिए एलपीजी की आधिकारिक दर लगभग 279 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम तय की थी। वहीं पहाड़ी इलाकों और प्रमुख शहरों में यह 500 से 600 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।

बलूचिस्तान में घरेलू सिलिंडर के दामों में भारी उछाल देखी गई है पहले जो सिलिंडर 4500 पाकिस्तानी रुपये का मिलता था वह अब करीब 7000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है।

पाकिस्तान रोजाना ईरान से लगभग 7000 मीट्रिक टन LPG आयात करता था। 23 अक्टूबर को 'गाबद-रिमदान' और 'ताफतान' बॉर्डर क्रॉसिंग बंद होने से टैंकर रास्तों में फंस गए, जिससे आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

रावलपिंडी और इस्लामाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस दिन में महज 4 से 6 घंटे ही मिल पा रही है। एलपीजी बेहद महंगी होने के कारण आम नागरिक खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने पर विवश हैं।

नेचुरल गैस, LNG और LPG तीनों में क्या है अंतर

पाकिस्तान के ऊर्जा संकट को समझने के लिए तीन ईंधनों का अंतर समझना बेहद जरूरी है।

ईंधन का प्रकार विवरण / घटक वितरण एवं उपलब्धता
प्राकृतिक गैस (Natural Gas) ज़मीन के भीतर से निकाली जाने वाली घरेलू गैस। सीधे पाइपलाइनों के नेटवर्क से घरों, बिजली संयंत्रों और उद्योगों तक पहुंचती है। (नोट: देश में इसका उत्पादन लगातार घट रहा है।)
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) प्राकृतिक गैस को -162°C पर ठंडा करके तरल रूप में बदला गया ईंधन। समुद्री जहाज़ों से आयात की जाती है; टर्मिनल पर पुन: गैस (RLNG) बनाकर पाइपलाइन नेटवर्क में सप्लाई की जाती है।
तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का गैसीय मिश्रण। सिलेंडरों में भरकर बेची जाती है; मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी जहाँ पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद नहीं है।
खपत व्यवहार: पाइप वाली सस्ती गैस उपलब्ध न होने पर लोग LPG की ओर रुख करते हैं, और LPG के दाम पहुंच से बाहर होने पर पारंपरिक व प्रदूषणकारी ईंधनों की ओर लौटते हैं।

घरेलू उत्पादन में तेज गिरावट

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स (PIDE) के आंकड़ों के मुताबिक देश का घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन वित्तीय वर्ष 2020 में 3,597 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन (MMCFD) था, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर मात्र 2,890 MMCFD रह गया। यानी पांच सालों में उत्पादन में लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई।

LNG का विरोधाभास

घरेलू उत्पादन गिरने पर पाकिस्तान ने 2015 से कतर और इटली की कंपनी 'एनी' के साथ 10 से 15 साल के दीर्घकालिक समझौते कर भारी मात्रा में LNG का आयात शुरू किया। इन 'टेक-ऑर-पे'समझौतों ने आपूर्ति तो पक्की की, लेकिन सरकार का लचीलापन छीन लिया।

इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस के अनुसार रूफटॉप सोलर के विस्तार और राष्ट्रीय ग्रिड से कम मांग के चलते 2025 में देश की LNG खपत में 1.21 मिलियन टन की गिरावट आई है।

पाकिस्तान ऐसी उलझन में फंसा जहां एक तरफ आम जनता गैस की किल्लत झेल रही थी, वहीं दूसरी तरफ देश के पास जरूरत से ज्यादा आयातित LNG का स्टॉक था।

घरेलू स्तर पर स्टोरेज क्षमता सीमित है, इसलिए इस महंगी गैस को घरेलू नेटवर्क में खपाना पड़ा। सरकार ने उपभोक्ताओं को बचाने के लिए कीमतें लागत से कम रखीं, जिससे वित्तीय नुकसान और बढ़ गया।

देश की अर्थव्यवस्था पर असर

पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक कुल गैस खपत में से 973 MMCFD बिजली क्षेत्र, 764 MMCFD उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षेत्र और 536 MMCFD सामान्य उद्योगों द्वारा उपयोग की जाती है, जबकि घरेलू क्षेत्र 777 MMCFD का उपयोग करता है।

उर्वरक कारखानों को गैस न मिलने या महंगी गैस मिलने से यूरिया का उत्पादन घटेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्यान्न महंगाई बेकाबू होगी।

टेक्सटाइल और विनिर्माण उद्योग महंगी ऊर्जा के कारण वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने राजनीतिक दबाव के चलते हाल की महीनों में गैस टैरिफ को स्थिर रखने का प्रयास किया है लेकिन यह समाधान केवल समस्या को आगे टालने जैसा है।

सिलिंडर की ऊंची कीमतें और बॉर्डर पर खड़े दरअसल उस गहरी व्यवस्थागत विफलता का नतीजा हैं, जहां दशकों से बुनियादी ढांचे, ऊर्जा संरक्षण और पारदर्शी नीतियों की उपेक्षा की गई।

जब तक पाकिस्तान गैस चोरी रोकने, वितरण कंपनियों की कार्यकुशलता सुधारने, नई खोजों के लिए माहौल बनाने और लक्षित सब्सिडी को सही ढंग से लागू करने जैसे कड़े संरचनात्मक कदम नहीं उठाता, तब तक हर सर्दी देश के नागरिकों के लिए ऐसी ही दुश्वारियां लाती रहेगी।

पाकिस्तान का गैस संकट एलपीजी की कीमतों से कहीं अधिक गंभीर है क्योंकि सिलिंडर तो सिर्फ एक पहलू है, जो एक व्यापक विफलता को दर्शाता है।

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