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पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाले चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट की डेडलाइन तय, NHPC की मुहर; सरकार ने जारी किया बजट

By Hansraj SainiEdited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 28 Oct 2026 11:33 AM (IST)Updated: Wed, 28 Oct 2026 11:47 AM (IST)

भारत द्वारा सिंधु जल संधि निलंबित करने के बाद NHPC ने चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट तीन को पूरा करने की ...और पढ़ें

चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट निर्माण की डेडलाइन तय कर दी है। प्रतीकात्मक फोटो

चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट निर्माण की डेडलाइन तय कर दी है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. NHPC ने चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट की डेडलाइन 3 साल तय की।

  2. परियोजना लागत 2301 करोड़ रुपये, निर्माण अवधि बढ़ाने की मांग खारिज।

  3. मुख्य बांध कोकसर में, विद्युत गृह मनाली के मढ़ी में बनेगा।

हंसराज सैनी, मंडी। भारत की ओर से सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने के बाद राष्ट्रीय जलविद्युत पॉवर निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) ने चिनाब ब्यास लिंक प्रोजेक्ट तीन को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है। पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली इस परियोजना का निर्माण कंस्ट्रक्शन कंपनियों को हर हाल में तीन साल में पूरा करना होगा। प्री-बिड बैठक में कंपनियों ने निर्माण अवधि 36 से बढ़ाकर 48 महीने करने की मांग की थी। 

एनएचपीसी ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि 2301 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना की समय सीमा में बदलाव नहीं होगा। परियोजना का मुख्य बांध लाहुल स्पीति के कोकसर में चंद्रा नदी पर और विद्युत गृह मनाली के मढ़ी में बनाया जाएगा।

दुर्गम क्षेत्र और हिमपात का दिया था हवाला

निविदा पूर्व बैठक में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने कहा था कि परियोजना क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम है। कड़ाके की ठंड और हिमपात से काम प्रभावित हो सकता है। कंपनियों के अनुसार, 7.2 मीटर व्यास वाली डबल शील्ड हार्ड राक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के परिवहन, असेंबली और अन्य कार्यों में काफी समय लगेगा। इस आधार पर उन्होंने निर्माण अवधि 36 से बढ़ाकर 48 महीने करने के साथ टीबीएम की असेंबली और डिसअसेंबली से जुड़ी शर्तों में छूट मांगी थी। एनएचपीसी ने अगले माह टीबीएम चिह्नित सुरंग स्थल तक पहुंचाने की शर्त रखी है। 

एनएचपीसी ने समयसारिणी को उचित बताया

कंपनियों की आपत्तियों पर उत्तर देते हुए एनएचपीसी प्रबंधन ने कहा कि निर्माण समय सारणी जमीनी सर्वेक्षण और तकनीकी अलाइनमेंट के बाद सावधानी से तैयार की गई है। परियोजना का सबसे अहम और मुश्किल काम रोहतांग दर्रे के नीचे बनने वाली करीब 8.7 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल (एचआरटी) की खोदाई है। इसमें टीबीएम से औसतन 300 मीटर प्रति माह उत्खनन का लक्ष्य रखा गया है। निगम के अनुसार कड़ाके की ठंड में भी भूमिगत कार्य जारी रह सकते हैं, इसलिए समय सीमा में बदलाव नहीं किया जाएगा। 

चंद्रा नदी के पानी को ब्यास नदी बेसिन में मोड़ने वाली परियोजना में बैराज, स्टिलिंग बेसिन, पावर इनटेक स्ट्रक्चर और वाटर डाइवर्जन टनल बनाए जाएंगे। ट्रैश रैक क्लीनिंग मशीन और उपठेकेदारों की संख्या को लेकर कंपनियों ने एकाधिकार के जोखिम से जुड़े व डंपिंग साइट पर प्रश्न भी उठाए थे। एनएचपीसी ने निविदा प्रविधानों का कड़ाई से पालन करने को कहा है।

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