इस्लामाबाद, एएनआइ। अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कदमों से पाकिस्तान खुश है लेकिन उसके लिए मुश्किल यह भी है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत होंगी। साथ ही दुनिया की नजरों में वह तालिबान को मजबूत करने वाले देश के रूप में पहचाना जाएगा। इससे आतंकियों की पनाहगाह होने की बदनामी झेल रहे पाकिस्तान की स्थिति और बदतर होगी। पाकिस्तान के कट्टरपंथी दशकों से तालिबान का समर्थन कर रहे हैं।

कट्टरपंथी खुश

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कब्जे से ये कट्टरपंथी खुश हैं। इन्हीं कट्टरपंथियों के एजेंडे पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ चलती है और पाकिस्तानी सेना व सरकार तालिबान पर अपने प्रभाव का रणनीतिक रूप में इस्तेमाल करती हैं। अफगानिस्तान की ताजा स्थिति पर काबुल से हुसैन हक्कानी ने अपनी जो रिपोर्ट पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को दी है उसमें तालिबान के बढ़ते प्रभाव का ब्योरा है।

बदल सकते हैं पाक के घरेलू समीकरण 

विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबान का बढ़ता दबदबा पाकिस्तान के घरेलू समीकरणों को बदल सकता है। कट्टरपंथी हिंसक तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है। पाकिस्तान का समाज पहले से बंटा हुआ है, जिस पर कट्टरपंथी अक्सर भारी पड़ते हैं लेकिन पड़ोसी देश अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ने पर यह कट्टरपंथी तबका और मजबूत हो सकता है जिसका असर पाकिस्तान की कानून व्यवस्था पर पड़ सकता है।

इसलिए तालिबान को साध रहा पाक 

विशेषज्ञ इस स्थिति को पाकिस्तान के लिए खतरनाक मानते हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना तालिबान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल रणनीतिक रूप में करना नहीं छोड़ना चाहती। इससे पाकिस्तान को भारत से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

पाकिस्तानी अधिकारी बोल रहे झूठ

अफगानिस्तान सरकार इस स्थिति से भली भांति परिचित है। वहां के उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा है कि तालिबान की गतिविधियों से पाकिस्तान उत्साहित है। वह तालिबान का गलत तरीके से समर्थन कर रहा है। पाकिस्तानी अधिकारी तालिबान के समर्थन को लेकर लगातार झूठ बोल रहे हैं, वास्तव में उनका समर्थन बयानों से आगे बढ़कर है।