नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। दो दिन बाद न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक (United Nations General Assembly) बैठक के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। महासभा के लिए दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान पहले ही बोल चुका है कि वह आमसभा में भी कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का मुद्दा उठाएगा। एक तरफ इमरान यूएन एसेंबली में भारत को घेरने की कोशिश कर रहे होंगे, दूसरी तरफ उन्हीं के देश के हजारों लोग उन्हें UNO (संयुक्त राष्ट्र संगठन) के बाहर बेनकाब करेंगे।

मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र महासभा 74वीं बैठक 24 सितंबर से शुरू हो चुकी है। 30 सितंबर तक चलने इस बैठक में 27 सितंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान महसभा को संबोधित करने का मौका मिलेगा। भारत इस बार पाकिस्तान से पहले महासभा को संबोधित करेगा। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत वैश्विक आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को बिना नाम लिए घेरने का प्रयास कर सकता है। वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कश्मीर मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।

पाकिस्तानी ही घेरेंगे इमरान को

महासभा के अंदर एक तरफ इमरान खान, जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत को घेरने का प्रयास करेंगे। दूसरी तरफ उन्हीं के देश के लोग उनके खिलाफ यूएनओ में मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे इस अभियान में कहा गया है कि पूरा देश पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हो रहा है।

सुबह नौ बजे शुरू होगा विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तानियों द्वारा UNO के बाहर इमरान खान के खिलाफ किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन का समय सुबह नौ बजे और तिथि 27 सितंबर निर्धारित की गयी है। मतलब जिस दिन इमरान खान को महासभा को संबोधित करना है, उसी दिन महासभा की बैठक शुरू होने से पहले ही उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका होगा।

इंटरनेट पर मुहिम को मिला समर्थन

पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार में हो रहे अत्याचार के खिलाफ इंटरनेट पर चलाई जा रही मुहिम को लोगों का काफ साथ मिल रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान के ही बलोच, गिलगिट बल्टिस्तान, मोहाजिर, पश्तून, सारिकी और सिंधी समुदाय के लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों ने भी इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है। पाकिस्तान के ही मशहूर लेखक और विश्लेषक तारेक फतह ने इस मुहिम को अपने ट्वीटर हैंडल से रिट्वीट किया है। साथ ही उन्होंने लिखा इस मुहिम में साथ देने का भी वादा किया है।

लंबे समय से पाक के खिलाफ मोर्चा खोले हैं संगठन

ये कोई पहला मौका नहीं है जब इमरान खान या पाकिस्तानी सरकार को इस तरह से अपने ही देशवासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले भी कई बार बलूचिस्तान, सिंध, खैबर-पख्तूनख्वां और गिलगिट-बल्टिस्टतान के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ खुलेआम विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। यहां के लोग पाकिस्तान पर उनसे दोहरा रवैया अपनाने और पाकिस्तानी सेना द्वारा उनका उत्पीड़न किए जाने का हमेशा आरोप लगाते रहे हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और हिंदुओं पर जुल्म किसी से छिपा नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार विरोध झेल रहा पाकिस्तान

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे तथ्यों के सहारे भारत को घेरने की नाकाम कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की हरकतें और उसका झूठ किसी से छिपा नहीं है। यही वजह है कि कश्मीर मुद्दे पर उसे दुनिया के किसी देश का साथ नहीं मिला। इमरान खान खुद भी ये बात स्वीकार चुके हैं। UNO में होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले भी पाकिस्तान को जेनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) के बाहर इसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ा था। ऐसे ही कुछ संगठनों द्वारा पिछले महीने ब्रिटेन में भी विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान पाकिस्तान के रेल मंत्री फवाद चौधरी को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा था। 27 अगस्त को बलोच नेताओं ने जर्मनी में भी पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

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Posted By: Amit Singh

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