नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इलाज के लिए लंदन पहुंच गए हैं। दरअसल अब तक वो मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद थे और सजा काट रहे थे। जेल में बंद रहने के दौरान उनकी तबियत बिगड़ने लगी, डॉक्टरों ने इलाज किया मगर बीमारी नहीं पकड़ पाए। डॉक्टरों ने सलाह दी कि नवाज को इलाज के लिए देश के बाहर जाना पड़ेगा, यदि वो लंदन जाकर इस बीमारी का इलाज कराएं तो जल्दी आराम मिलेगा।

देश से बाहर जाकर इलाज कराने के लिए नवाज की ओर से लाहौर हाइकोर्ट में अप्लीकेशन लगाई गई। तबियत बिगड़ने पर लाहौर हाइकोर्ट ने 25 अक्टूबर को उनको जमानत दे दी। इसके बाद वो कतर के शाही खानदान की वीआइपी एयर एंबुलेंस से ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए। अब वहां उनका इलाज होगा। नवाज शरीफ अपने भाई शहबाज, निजी डॉक्टर और दो नौकरों के साथ ब्रिटेन के लिए रवाना हुए हैं। 

परिवार काफी समय से कर रहा था मांग 

शरीफ का परिवार काफी वक्त से मांग कर रहा था कि नवाज को इलाज के लिए विदेश भेजा जाए लेकिन परिवार की ये मांग मानी नहीं जा रही थी। दरअसल पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (नैब) ने नवाज के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामले दर्ज किए थे। यहां पर केस चला उसके बाद नैब की अदालत ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया था, इसी वजह से नवाज शरीफ सजा काट रहे थे। इसके बाद नैब ने उन पर एक तीसरा केस दर्ज किया, जिसकी वजह से उन्हें जेल से लाहौर स्थित नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो में बुलाया गया।

डॉक्टर ने ट्वीट के माध्यम से चलाया अभियान, मिली इजाजत 

नवाज शरीफ को विदेश जाने की अनुमति नहीं मिल रही थी, तब उनके निजी डॉक्टर ने ट्वीटर के माध्यम से अभियान चलाया। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि हम नवाज शरीफ के स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए इजाजत मांग रहे हैं, हम लोग उन्हें सेहतमंद देखना चाहते हैं, उनकी तबियत ठीक नहीं है मगर जब उन्हें इजाजत मिली तो ये सामने आया कि नवाज शरीफ की तबियत ठीक नहीं है, उसके बाद नवाज शरीफ को लाहौर के एक सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। 

ऑटो इम्यून डिजीज की बीमारी आई सामने 

पाकिस्तान के इलाज में नवाज का इलाज जारी रहा। वहां पर 5 से 6 सप्ताह तक उनका इलाज हुआ। इस दौरान उनको बताया कि उनके शरीर में प्लेटलेट्स कम हैं, इन 6 सप्ताह के दौरान तमाम तरह के टेस्ट किए गए जिसमें ये सामने आया कि उनको ऑटो इम्यून डिजीज की बीमारी है। इसी बीमारी की वजह से उनके प्लेटलेट्स में कमी आती है। इसको मेंटेन करने के लिए उन्हें दवाइयां दी गई और इंजेक्शन भी लगाए गए मगर खास फायदा नहीं हुआ। नवाज की कभी प्लेटलेट्स बढ़ जाती है। इसी वजह से वो शारीरिक रूप से भी कमजोर हो रहे हैं।

सरकार ने बनाया मेडिकल बोर्ड, निकलीं बीमारियां 

इसके बाद सरकार ने एक मेडिकल बोर्ड बनाया था, उन्होंने इस पूरे मामले में जांच की और कहा कि नवाज शरीफ को बहुत सारी बीमारियां हैं। इसमें हार्ट की बीमारी भी है, शुगर है और किडनी से जुड़े मामले भी हैं। इसलिए डॉक्टर्स के लिए ये पता लगाना बहुत मुश्किल हो रहा था कि प्लेटलेट्स कम होने की असली वजह क्या है। इसी के साथ ये भी कहा गया कि नवाज शरीफ को ऐसी भी कुछ समस्या हो सकती है जिसके टेस्ट पाकिस्तान में नहीं होते हैं, इस वजह से इस मेडिकल बोर्ड ने रेफर किया कि नवाज लंदन में जाकर ही अपना इलाज कराएं। 

नवाज का नाम ईसीएल लिस्ट में 

दरअसल पाकिस्तान में नवाज शरीफ का नाम ईसीएल(एक्जिट कंट्रोल लिस्ट) में शामिल है। इस वजह से वो देश से बाहर नहीं जा सकते। ये पता चलने पर नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने सरकार से नवाज शरीफ को विदेश जाकर इलाज करवाने की इजाजत मांगी। इस पर पाकिस्तान की सरकार ने कहा कि ये कोर्ट का मामला है, इसलिए पहले वो कोई अशॉरिटी बॉन्ड सरकार के पास जमा कर दें, उसके बाद विदेश जाएं।

बॉन्ड की बात मानने से किया इनकार, खटखटाया अदालत का दरवाजा 

नवाज शरीफ की पार्टी पीएलएमएन और खुद नवाज ने इसे मानने से इनकार कर दिया, उसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली। उन्होंने लाहौर हाईकोर्ट में अपील दायर की, उस पर सुनवाई के बाद जजों ने ये फैसला दिया कि नवाज शरीफ को चार सप्ताह के लिए एक बार जाने की इजाजत दी जाएगी। इसी के बाद नवाज पाकिस्तान से लंदन अपना इलाज कराने के लिए जा सके।

डॉक्टर की राय 

डॉ.गौरव गुप्ता का कहना है कि जिन लोगों को ऑटो इम्यून डिजीज की बीमारी हो जाती है उनके शरीर के जो अंग एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं वो कमजोर हो जाते हैं। इनका अगर लंग्स और किडनी पर भी पड़ता है। किडनी खराब हो जाने की वजह से शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका असर पड़ता है। भारत में इस तरह की बीमारियों के केस सामने आते रहते हैं और कई मेडिकल कॉलेजों में इनका इलाज भी संभव है। इस बीमारी पर रिसर्च भी चल रही है। चूंकि शरीर के इम्यून सिस्टम में खराबी आ जाती है इस वजह से प्लेटलेट्स भी गिरता जाता है। कई बार ब्लीडिंग की भी शुरूआत हो जाती है।  

Posted By: Vinay Tiwari

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