नई दिल्ली [उपेंद्र सूद] । भारत-पाक विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था जिसने पाकिस्तान में नफरत की आंधी पैदा और आगे चलकर 1990 के दशक में यह कश्मीर में आतंकवाद भड़काने का काम करने लगा। पाकिस्तान 1947 से ही कश्मीर राग अलाप रहा है। आजादी के बाद से भारत ने कई सफलताएं हासिल की है, लेकिन पाकिस्तान ने आतंकवाद और हथियारों की होड़ में तरक्की की है। जिस तरह हाथी के दिखाने के दांत कुछ और ओर खाने के कुछ और उसी तरह पाकिस्तान ने भी दिखावे के तौर पर आतंकवादी हाफिज सईद को नजरबंद कर रखा था।

हाफिज के मुद्दे पर पाक को अमेरिकी चेतावनी

अमेरिका ने हालांकि मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को तुरंत गिरफ्तार करने के लिए कहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी सारा सेंडर्स ने कहा, ‘अमेरिका लश्कर-ए-तैयबा आतंकी हाफिज सईद को रिहा करने की निंदा करता है। हम चाहते हैं कि उसे दोबारा से गिरफ्तार किया जाए और उस पर केस चलाया जाए।’ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को मिलने वाली मदद में कटौती की बात करते रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिका ने पिछले साल पाकिस्तान को 1.5 अरब डॉलर की मदद दी है। जाहिर है कि इतनी बड़ी रकम का एक मोटा हिस्सा पाकिस्तान ने भारत विरोधी गतिविधियों पर भी खर्च किया है।

ISPR और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार

पाकिस्तान की एक एजेंसी है आइ.एस.पी.आर. यानी इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन जिसका निर्माण, भारत पाकिस्तान के बीच पैदा हुई नफरत के आधार पर, पाकिस्तान ने नफरत के फैलाने के लिए किया है। इसका काम भारत और भारतीय सुरक्षा बलों व भारतीयों को बदनाम करना है। कश्मीर पर आधारित ‘संगबाज’ फिल्म का निर्माण इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने किया। इसमें यह बताने की कोशिश की गई है कि पाकिस्तान ही कश्मीर के लोगों का हमदर्द है, संगबाज है, भारत तो उसे लूट रहा है। ‘संगबाज’ के अलावा आइ.एस.पी.आर. ने कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में और छद्मवेशी तरीके से पर्दे के पीछे से कई पाकिस्तानी फिल्मों को भी वित्तीय मदद की है। जैसे वार, चबेली और अब डॉ. तौसीफ रजाक की फिल्म। भारत ने पाकिस्तान के इन हथकंडों का घोर विरोध किया है।

पाक डॉक्यूमेंट्री में कश्मीर मुख्य मुद्दा

पाकिस्तान टीवी पर हर रोज भारत के खिलाफ खबरें ही नहीं बल्कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में, सीरियल आदि भी प्रसारित किए जाते हैं। इन सब में कश्मीर मुख्य मुद्दा होता है। इनमें कश्मीर में भारतीय फौजों द्वारा मासूम कश्मीरियों पर किए गए अत्याचार, जुल्म की कहानियां व किस्से आदि होते हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि पिछले कुछ समय से सैकड़ों पाकिस्तानी परिवारों ने विदेश मंत्रलय की मदद से भारतीय अस्पतालों में अपना बेहद मुश्किल इलाज कराया है और इन सब लोगों की सहायता भारत सरकार ने की है। पाकिस्तान से आए परिवार की सरकार ने हमेशा मदद की है। भारत सरकार ने कभी भी किसी भी परिवार को बुरी भावना से देखा है। भारतीय सरकार ने कभी दुर्भावना के साथ काम नहीं किया, लेकिन पाकिस्तान अपनी करतूतों से कहां बाज आने वाला है। पड़ोसी देश को जैसे ही मौका मिलता है भारत के खिलाफ कुछ करने से पीछे नहीं हटता है।

कहते हैं लोहे को लोहा काटता है। जैसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के प्रचार विभाग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस द्वारा करोड़ों रुपये के खर्च की परवाह किए बिना कश्मीर की जनता को लुभाने के लिए प्रचार के हर माध्यम फिल्म, टीवी, अखबार, न्यूज एजेंसी, इंटरनेट, रेडियो एवं सोशल मीडिया आदि का इस्तेमाल करता है, वैसा ही हमारी सरकार एवं हमारी खुफिया एजेंसियों को भी करना चाहिए। तभी तो कश्मीर के पत्थरबाजों को हम यह समझा पाएंगे कि स्कूलों को जलाने और शिक्षकों को मारने के पीछे पाकिस्तान का मकसद था वहां के भोले भाले नौजवानों को असलियत से महरूम रखना ताकि उन्हें आसानी से बरगलाया जा सके।
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Posted By: Lalit Rai

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