नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। पाकिस्तान दिवस पर पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री इमरान खान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो पत्र लिखा था, उसका जवाब आ गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात तो कही, लेकिन अपनी आदत से बाज नहीं आए और यह भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान किए बगैर दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती। यही नहीं, इमरान ने अपने पत्र में पाकिस्तान की स्थापना की बात करके इशारों में कुछ और भी कहने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हो रहे इस पत्र व्यवहार का असर जमीनी तौर पर होता है या नहीं।

बोले, जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान किए बगैर दोनों देशों के बीच स्थायी शांति संभव नहीं

इमरान ने अपने पत्र की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से लिखे गए पत्र के लिए धन्यवाद करने से की है। आगे वह लिखते हैं, 'पाकिस्तान की जनता इस दिवस का आयोजन कर अपने संस्थापकों की दूरदर्शिता और बुद्धिमता के प्रति आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने एक स्वतंत्र, संप्रभु देश के बारे में सोचा। जहां वे आजादी से रह सकें और अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकें। पाकिस्तान भी भारत समेत अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्वक व सहयोग से रहने की इच्छा रखता है।

हम विश्वास करते हैं कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थायित्व के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर समेत सभी अन्य मुद्दों का समाधान हो। रचनात्मक परिणाम निकालने के लिए वैसा ही माहौल बनाना बहुत ही जरूरी है। मैं इस अवसर पर कोविड-19 महामारी से लड़ाई में भारत की जनता को अपनी शुभकामनाएं भी देता हूं।'

पीएम मोदी ने पाकिस्तान दिवस पर लिखा था पत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने 23 मार्च, 2021 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। मोदी ने अपने पत्र में लिखा था, एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद व आक्रामकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है। 

मोदी ने इमरान खान को लिखा था कि, 'पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं पाकिस्तान के अवाम को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद एवं आक्रमकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है। मान्यवर, मानवता के इस बेहद कठिन काल में मैं आपको और पाकिस्तान की जनता को कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के लिए भी शुभेच्छा देना चाहूंगा।'

मोदी के इस पत्र से पहले इमरान खान और पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर बाजवा ने भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की बात कही थी। जनवरी, 2016 में पठानकोट में पाक परस्त आतंकियों के हमले के बाद से दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावग्रस्त चल रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष विराम हुआ है, जिससे बातचीत को लेकर माहौल बना है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि अगर भारत और इस्लामाबाद के बीच शांति स्थापित होती है तो इससे नई दिल्ली को संसाधन संपन्न मध्य एशिया तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इमरान ने दावा किया कि वर्ष 2018 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए काफी कदम उठाए, लेकिन नई दिल्ली की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इसके बाद पाकिस्तान आर्मी के चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने भारत- पाकिस्‍तान के बीच दोस्ती की बात की थी। जनरल बाजवा ने कहा था, हम अपने सभी पड़ोसियों के साथ सारे विवादित मुद्दों का समाधान बातचीत से और गरिमापूर्ण तरीके से करना चाहते हैं। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह विकल्प हम किसी दबाव में नहीं बल्कि तार्किक ढंग से अपना रहे हैं। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि सुधारने और एक शांतिपूर्ण देश के तौर पर आगे बढ़ने के लिए गंभीर हैं। 

 

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